चौका स्वयं के लिए बनाना चाहिए, पुण्ययोग से साधु आ जाते हैं : मुनि श्री निष्पक्ष सागरजी की विधि न मिली दूसरे गांव में हुई आहारचर्या

आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के शिष्य आचार्य श्री समयसागर जी शिष्य मुनि श्री निष्पक्ष सागरजी महाराज संघ सहित भानपुरा में विराजमान है। उनके सानिध्य में गत दिनों अलौकिक धर्म प्रभावना हुई। गुरुवार को चतुर्दशी की बेला में महाराज श्री की उत्कृष्ट तपस्या देखने को मिली। भानपुरा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह रिपोर्ट...
भानपुरा। आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के शिष्य आचार्य श्री समयसागर जी शिष्य मुनि श्री निष्पक्ष सागरजी महाराज संघ सहित भानपुरा में विराजमान है। उनके सानिध्य में गत दिनों अलौकिक धर्म प्रभावना हुई। गुरुवार को चतुर्दशी की बेला में महाराज श्री की उत्कृष्ट तपस्या देखने को मिली। जब गुरुदेव प्रवचन उपरांत आहार के लिए निकले पड़गाहन का समय था। गुरुदेव निकले, सभी चौकों में गुरुदेव ने पडगाहन दिया लेकिन, विधि नहीं मिली। गुरुदेव चलते गए चलते गए और 3 किमी दूर लौटखेड़ी गांव तक गए वहां जाकर गुरुदेव की विधि मिली। इतने उत्कृष्ठ तपस्वी संत की आहारचर्या मुनि भक्त शरदकुमार, नवीन कुमार, दिलीप, विजय दोराया परिवार के आवास पर हुई। निश्चित रूप से यह क्षण यह यही दर्शाते हैं कि गुरुदेव पूर्ण नवधा भक्ति का पालन करते हैं और साधना के रास्ते चलते रहते हैं और इससे शिक्षा मिलती है कि साधु के लिए नहीं, चौका स्वयं के लिए बनाना चाहिए, पुण्ययोग से साधु आ जाते हैं।
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