नौगामा (बांसवाड़ा)। दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव से आराधना की गई। प्रातःकाल आदिनाथ मंदिर, भगवान महावीर समवशरण मंदिर एवं सुखोदय तीर्थ नसियाजी में अभिषेक और विशेष शांतिधारा सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हुए। जैन समाज प्रवक्ता सुरेश चंद्र गांधी ने बताया कि मुख्य मंडप से श्रीजी को गाजे-बाजे के साथ विशाल पंडाल में लाकर विराजमान किया गया। इसके बाद विशेष अभिषेक एवं शांतिधारा की गई।
पंचोरी विमल कुमार-सागरमल को मिला प्रथम अभिषेक का सौभाग्य
श्रीजी का प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य पंचोरी विमल कुमार-सागरमल को प्राप्त हुआ। इसके बाद पं. रमेश चंद्र गांधी एवं वीना दीदी के सान्निध्य में देव-शास्त्र-गुरु पूजन, सरस्वती पूजन और दशलक्षण धर्म की पूजन की गई। गीतकार राजेंद्र जैन के मधुर भजनों के बीच श्रद्धालुओं ने गरबा नृत्य करते हुए पूजन के अर्घ्य समर्पित किए। महिला मंडल की ओर से तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन भी किया गया।
‘उपलब्धियां बढ़ें, लेकिन अहंकार नहीं’
उत्तम मार्दव धर्म पर मंगल प्रवचन में पीयूष शास्त्री ने कहा कि “उत्तम मार्दव धर्म हमें सिखाता है कि जीवन में कितना भी ज्ञान, धन, पद या सम्मान मिले, मन में अहंकार नहीं आना चाहिए।” उन्होंने कहा कि उपलब्धियां मनुष्य के व्यवहार में अहंकार के बजाय विनम्रता लाएं। मार्दव धर्म मान-कषाय को कम कर सरलता और नम्रता की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।
48 दीपों से जगमगाया विधान
सायंकाल आनंद यात्रा के साथ वागड़ के बड़े बाबा के समक्ष गीतकार राजेंद्र जैन के मधुर स्वरों के बीच महाआरती की गई। इसके बाद 48 दीप विधान में 48 दीप प्रज्ज्वलित कर आराधना की गई। भक्ति संगीत और दीपों की रोशनी के बीच श्रद्धालुओं ने धर्म आराधना करते हुए मंगल भावना व्यक्त की।
बच्चों ने किया रामायण नाटिका का मंचन
धार्मिक कार्यक्रमों के बाद जैन पाठशाला के बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। मनीषा नानावटी के निर्देशन में बच्चों ने रामायण पर आधारित नाटिका का मंचन किया। प्रस्तुति के माध्यम से धार्मिक प्रसंगों और संस्कारों का संदेश दिया गया। जैन समाज प्रवक्ता सुरेश चंद्र गांधी ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत आगामी दिनों में भी धर्म आराधना और विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।




