आगरा। निर्मल सेवा सदन, रकाबगंज-छीपीटोला में पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना के साथ आत्मस्पंदन ध्यान शिविर आगरा-2026 का श्रद्धा एवं उत्साह के साथ शुभारंभ हुआ।
आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 समत्वसागर जी महाराज, मुनि श्री 108 शीलसागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 सुप्रभातसागर जी महाराज के सान्निध्य और पं. प्रदीप शास्त्री, दमोह के मार्गदर्शन में शिविरार्थियों ने धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों में सहभागिता की।
अभिषेक-शांतिधारा के साथ शुरू हुई आराधना
शिविर में श्रद्धालुओं ने पूजन, अभिषेक एवं शांतिधारा में भक्तिभाव से भाग लिया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट एवं मंगलाचरण हुआ।
दिनभर भक्ति, साधना, अनुशासन और आत्मचिंतन का वातावरण बना रहा। शिविरार्थियों ने मनोयोग से विभिन्न धार्मिक गतिविधियों में भाग लिया।
‘प्रतिष्ठित परिवार की पहचान उसके व्यवहार से भी करें’
मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज ने उत्तम मार्दव धर्म पर मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि व्यक्ति को केवल उसकी बाहरी वेशभूषा, पैसा, यश और कीर्ति देखकर पहचानना उचित नहीं है। किसी प्रतिष्ठित परिवार की वास्तविक पहचान करते समय उसके व्यवहार को भी देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अनुकूल परिस्थितियों में शांत रहना और मधुर भाषा बोलना ही अहंकार से मुक्त होने का प्रमाण नहीं है। व्यक्ति के वास्तविक स्वभाव की परीक्षा विपरीत परिस्थितियों में होती है।
‘ब्रांडेड वस्तुएं स्टेटस का आधार नहीं’
मुनिश्री ने युवाओं में महंगी और ब्रांडेड वस्तुओं को प्रतिष्ठा से जोड़ने की प्रवृत्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि वस्तुओं की कीमत को अपने सम्मान और व्यक्तित्व का पैमाना नहीं बनाना चाहिए
उन्होंने कहा कि कई बार मनुष्य के पास सब कुछ होने के बाद भी उसके भीतर ऐसी कमी रह जाती है, जिसे वह स्वयं नहीं पहचान पाता। धन और सुविधाएं बढ़ने के साथ यदि अहंकार भी बढ़ जाए तो व्यक्ति के व्यवहार में उसका प्रभाव दिखाई देने लगता है।
फिल्म ‘3 इडियट्स’ के प्रसंग से समझाया अहंकार
मुनिश्री ने गृहस्थ जीवन में देखी फिल्म ‘3 इडियट्स’ के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए समझाया कि महंगी शेरवानी और ब्रांडेड वस्तुओं का बार-बार प्रदर्शन करने वाला पात्र स्वयं को बड़ा मानता था। लेकिन शेरवानी पर चटनी गिरने की छोटी-सी घटना ने उसके भीतर छिपे अहंकार को सामने ला दिया।
इस उदाहरण के माध्यम से मुनिश्री ने कहा कि कई बार व्यक्ति सामान्य परिस्थितियों में विनम्र दिखाई देता है, लेकिन उसकी प्रिय या महंगी वस्तु को नुकसान पहुंचने अथवा उसके सम्मान को चोट लगने पर उसकी वास्तविक प्रतिक्रिया सामने आती है।
‘क्रोध के पीछे अहम् को लगी चोट को भी पहचानें’
मुनि श्री समत्वसागर जी ने कहा कि लोग अक्सर पूछते हैं कि क्रोध को कैसे शांत किया जाए, लेकिन क्रोध के पीछे छिपे कारण को भी समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कई बार अहम् भावना को चोट लगना क्रोध का मूल कारण बनता है। व्यक्ति के पास पद, पैसा या प्रतिष्ठा होने के बावजूद जब उसका नाम नहीं लिया जाता अथवा उसे अपेक्षित महत्व नहीं मिलता, तब उसके अहम् को चोट पहुंचती है। मार्दव धर्म इसी अहंकार को पहचानकर कम करने की प्रेरणा देता है।
19 सितंबर को उत्तम आर्जव धर्म की आराधना
कार्यक्रम का मंच संचालन सतेंद्र जैन साहूला ने किया। इस अवसर पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के रमेश जैन, मनोज जैन, मुकेश जैन, प्रवीण जैन पद्मावती, शैलेश जैन, मुकेश जैन लले, विवेक जैन, चक्रेश जैन, राजीव जैन, आशीष जैन बाबा, सतेंद्र जैन साहूला, दीपक जैन, रोहित जैन सहित सकल जैन समाज के श्रद्धालु मौजूद रहे।
मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि 19 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजे निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में उत्तम आर्जव धर्म के अवसर पर मुनिसंघ के सान्निध्य में अभिषेक, पूजन, विधान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।




