हर अपना कहने वाला अपना नहीं होता : मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने विश्वास को बताई बड़ी पूंजी

आचार्य विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागर महाराज जी ने प्रवचन में कहा कि हमारी ज़िंदगी में सबसे गहरी चोटें तलवार से नहीं, भरोसे से लगती है। दुश्मन जो सामने होता है, वो वार करता है तो हम संभल जाते हैं। पर जब अपना ही पीछे से वार कर दे, तो ना सिर्फ़ हम गिरते हैं, बल्कि अंदर से टूट जाते हैं। पथरिया से पढ़िए, यह खबर...
पथरिया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का चातुर्मास विरागोदय तीर्थ पथरिया में चल रहाह है। आचार्य विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागर महाराज जी ने प्रवचन में कहा कि हमारी ज़िंदगी में सबसे गहरी चोटें तलवार से नहीं, भरोसे से लगती है। दुश्मन जो सामने होता है, वो वार करता है तो हम संभल जाते हैं। पर जब अपना ही पीछे से वार कर दे तो ना सिर्फ़ हम गिरते हैं, बल्कि अंदर से टूट जाते हैं। असल में सबसे ज़्यादा वार वहीं होता है, जहाँ सबसे ज़्यादा भरोसा होता है क्योंकि, जहां भरोसा होता है, वहां हम अपनी सुरक्षा छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि अपना मन, अपनी बातें, अपने डर और अपनी कमजोरियां हम खुलकर बता देते हैं और फिर वही बातें, जब कोई अपना ही हमारे खिलाफ इस्तेमाल करता है, तो वो वार दिल को चीर जाता है लेकिन, यही पल हमें सिखाते हैं कि हर अपना कहने वाला अपना नहीं होता और हर साथ देने वाला साथ नहीं निभाता। इसलिए जीवन में सीखना ज़रूरी है।भरोसा करो, लेकिन आँखें बंद मत करो। रिश्ते निभाओ, लेकिन अपनी सीमाओं को पहचानो। किसी पर इतना न झुको कि वो तुम्हें तोड़ने लगे। जिन्होंने तुम्हारे भरोसे को तोड़ा है, उन्हीं से सीख कर तुम आज और मज़बूत बन सकते हो। इसलिए हार मत मानो क्योंकि, भरोसा टूटा है, तुम नहीं। तुम अब भी उतने ही सच्चे हो। बस अब थोड़े ज्यादा समझदार भी।
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