मुनि श्री विशल्य सागर जी का नेपाल सीमा में प्रथम प्रवेश : नेपाल की धरती पर पहली बार जनसमुदाय को दिए आशीर्वचन

दिगंबर जैन धर्म के इतिहास में गुरुवार को स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। मुनि श्री विशल्य सागर जी महाराज ससंघ के साथ नेपाल सीमा में प्रवेश करने वाले प्रथम दिगंबर जैन साधु बनने का गौरव प्राप्त किया। यह घटना अहिंसा और सद्भाव के संदेश को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक पहुंचाने की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम है। मिथिलापुरी से पढ़िए जैन राजकुमार अजमेरा की यह रिपोर्ट...
मिथिलापुरी(सुरसंड/बिहार)। दिगंबर जैन धर्म के इतिहास में गुरुवार को स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। मुनि श्री विशल्य सागर जी महाराज ससंघ के साथ नेपाल सीमा में प्रवेश करने वाले प्रथम दिगंबर जैन साधु बनने का गौरव प्राप्त किया। यह घटना अहिंसा और सद्भाव के संदेश को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक पहुंचाने की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम है। मुनि श्री विशल्य सागर जी ससंघ का यह ऐतिहासिक प्रवास मिथिलापुरी जी दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र पर दो दिवसीय भव्य पंचकल्याणक महा महोत्सव के समापन के तुरंत बाद हुआ। पंचकल्याणक के आध्यात्मिक वातावरण से प्रेरित होकर मुनिराज ने तीर्थ क्षेत्र से मात्र 5 किमी की दूरी पर स्थित नेपाल बॉर्डर की ओर प्रस्थान किया। जैन धर्म के सिद्धांतों और अहिंसा के मार्ग को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से मुनिराज ने नेपाल सीमा में लगभग 1 किमी अंदर तक पदयात्रा की। यह प्रथम अवसर था, जब किसी दिगंबर जैन मुनि ने इस क्षेत्र से नेपाल की सीमा के अंदर प्रवेश किया हो। नेपाल सीमा के भीतर पहुंचकर मुनि श्री विशल्य सागर जी महाराज ने वहां उपस्थित जनसमूह को अपना आशीर्वाद और प्रवचन दिया। अपने तेजस्वी उद्बोधन में मुनिराज ने सभी को भगवान महावीर के दिखाए गए अहिंसा के मार्ग पर चलने, सत्य, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य के सिद्धांतों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। उन्होंने सभी मनुष्यों के बीच प्रेम, करुणा और भाईचारे के रिश्ते को मजबूत करने पर बल दिया। मुनिराज के इस ऐतिहासिक कार्य से न केवल दिगंबर जैन समाज गौरवान्वित हुआ है, बल्कि यह घटना भारत और नेपाल के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को एक नई ऊँचाई प्रदान करती है। यह संदेश देता है कि धर्म और अध्यात्म की शक्ति सभी भौगोलिक सीमाओं से परे है। यह ऐतिहासिक क्षण मुनि श्री विशल्य सागर जी महाराज की निर्भीकता और वैश्विक सद्भाव के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसने भविष्य के लिए एक महान उदाहरण स्थापित किया है।
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