सीकर। अनेक श्रद्धालुओं के सामने शुक्रवार को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के शिष्य मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने दंग की नसिया में केशलोचन किया। केशलोचन के बारे में संघ के मुनि श्री चिंतन सागर जी ने चर्चा में बताया कि प्रत्येक दिगंबर साधु को 2 माह से 4 माह की अवधि के भीतर के केशलोचन करना अनिवार्य है। केशलोच दिगंबर साधु का मूल गुण है। केशलोचन के माध्यम से शरीर से राग और मोह दूर होता है। केश लोचन की प्रक्रिया में मुनि श्री ने बताया कि केशलोचन करते समय केवल राख का उपयोग किया जाता है। जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है। केशलोचन अगर नहीं किए जाएं तो उसमें छोटे-छोटे जीवो की उत्पत्ति होने की संभावना होती है। जैन साधु अहिंसा धर्म के महाव्रती होते हैं। बाल हाथों से इसलिए उखाड़े जाते हैं कि बालों को कटिंग करने के लिए सेविंग कराने के लिए अन्य द्रव्य की आवश्यकता होती है।
केश लोचन देख अनुमोदना से पुण्य की प्राप्ति
डॉ.राजेश पंचोलिया के अनुसार मुनि श्री ने बताया कि जैन साधु अपरिग्रही होते हैं। इसलिए जैन साधु अपने हाथ से केशलोचन करते हैं बाल सौंदर्य का प्रतीक हैं इससे राग और आकर्षण होता है। केश लोच से शरीर से ममत्व दूर होता है केश लोचन के समय तप,संयम, धैर्य के साथ धर्म की प्रभावना होती है जिस दिन जैन साधु केशलोच करते हैं उस दिन उपवास करते हैं। केश लोचन देखकर अनुमोदना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। कर्मों की निर्जरा होती है। इस अवसर पर अनेक समाज जन उपस्थित रहे। अनेक महिलाओ ने वैराग्य पूर्ण भजन गा कर केशलोचन की तपस्या की अनुमोदना की।
श्रीफल साथी: डॉ. राजेश पंचोलिया, इंदौर




