बदनावर। 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय पुरातत्व दिवस मनाएंगे। यह अक्टूबर माह के तृतीय शनिवार को यह मानते हैं। विश्व धरोहर दिवस ऐतिहासिक इमारतों और धरोहरों के संरक्षण के लिए समर्पित है, जबकि इस दिन को पुरातत्व विज्ञान और अतीत की खोज की प्रक्रिया के उत्सव के रूप में मनाए जाने का प्रावधान है। भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय भी इस अवसर पर पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत पर राष्ट्रीय सम्मेलन कर रहा है। निर्ग्रन्थ आर्केलाजी सर्वे ऑफ इंडिया इंदौर संभाग के पुरातत्व संयोजक एवं वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि हमारा ज्ञात पुरातत्व अतीत का दर्पण, वर्तमान की धरोहर और भविष्य की विरासत प्राचीन प्रतिमाएँ शिलालेख और अन्य अवशेष केवल पत्थर नहीं, इतिहास की बोलती हुई गाथा हैं।

उत्कीर्ण प्रतिमा लेखों ने इतिहास के कई राज खोले

बदनावर नगर के पुरातत्व के सन्दर्भ में पाटोदी ने बताया कि मालवांचल में पुरातत्व की दृष्टि से बदनावर (प्राचीन नाम वर्द्धमानपुर) का अत्यधिक महत्वपूर्ण यहां से सिर्फ हजार वर्ष प्राचीन सैकड़ों तीर्थंकर व यक्ष-यक्षिका प्रतिमा ही नहीं हुई बल्कि उन पर उत्कीर्ण प्रतिमा लेखों ने इतिहास के कई राज खोले हैं। नगर को सिर्फ अपना प्राचीन नाम वर्द्धमानपुर ही प्राप्त नहीं हुआ बल्कि हजार वर्ष प्राचीन राजवंश और उनके सांस्कृतिक अवदान को भी प्रदर्शित किया है। वर्तमान में आज भी पूर्व में ढांगा बाबजी और ढोलाना पंचकवासा पिटगारा की प्राचीन बावड़ियों से लेकर उड़िया मंदिर और सांकल बावड़ी पर ही खत्म नहीं होता बल्कि उत्तर दक्षिण पश्चिम में सियाजीत हनुमान, काली बावड़ी, हाथियां बावड़ी, प्राचीन दीवार, संभवनाथ मंदिर, भोयरावाला मंदिर, चिंतामण गणेश, किला, शांतिनाथ जैन मंदिर, जिंदा समाधी, नागेश्वर, छतरियां, शानेश्वर, एकवीरा मंदिर दर्जनों स्थान है जो पुरातत्व की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। इस नगर का महत्व सिर्फ पुरातत्व अवशेषों की दृष्टि से नहीं बल्कि साहित्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

प्राचीन नाम वर्द्धमानपुर भी पुनः प्राप्त हो

यह लिखे गए हरिवंश पुराण और वृहद कथा कोष जैसे ग्रंथ भारतीय ज्ञान परम्परा में अपना विशेष महत्व रखते हैं। इस दृष्टि से धार्मिक ग्रंथों की रचना स्थली होने का गौरव इस नगर को प्राप्त है। पुरातत्व, आध्यात्म और ज्ञान की त्रिवेणी जो हर किसी नगर को प्राप्त नहीं है वह इस ऐतिहासिक नगरी वर्द्धमानपुर को प्राप्त है। परन्तु जो खोज और अध्ययन इस नगर पर होना था उससे यह सर्वथा वंचित ही रहा। यह नगर वासियों और पुरातत्व विभाग दोनों की कमजोरियों को दर्शाता है। आज अंतराष्ट्रीय पुरातत्व दिवस पर वर्द्धमानपुर शोध संस्थान नगर वासियों से एक ही अपील करता है कि बिना किसी प्रयास के मिले इस अनमोल वैभव को ऐसे ही व्यर्थ नहीं जाने दे। इस नगर को इसका प्राचीन वैभव पुनः प्राप्त हो साथ ही इसका प्राचीन नाम वर्द्धमानपुर भी पुनः प्राप्त हो। इसके लिए जागरुकता का प्रयास करें। तभी अंतराष्ट्रीय पुरातत्व दिवस मनाने की सार्थकता है।