मुरैना। चातुर्मासरत आचार्यश्री 108 उदारसागरजी महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर की धर्मसभा में कहा कि जैन दर्शन में संयम साधना का विशेष महत्व है। संयमित जीवन जीने वाला व्यक्ति अपने आचरण, व्यवहार और विचारों से सम्मान प्राप्त करता है, जबकि असंयम व्यक्ति को पतन की ओर ले जाता है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक क्रियाओं और अनुष्ठानों की सार्थकता तभी है, जब उनके साथ आत्मसंयम तथा निर्मल भाव जुड़े हों।

मन, वचन, काय और इंद्रियों पर नियंत्रण

आचार्यश्री ने कहा कि संयम का वास्तविक अर्थ मन, वचन, काय और इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए आत्मा को विकारों से बचाना है। केवल बाहरी आडंबर या धार्मिक क्रियाओं से आत्मकल्याण संभव नहीं, बल्कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी कषायों पर विजय प्राप्त करने का प्रयास आवश्यक है।

संयम व्यक्ति को धैर्यवान, विवेकशील और आत्मानुशासित बनाता है। इससे जीवन में शांति, संतुलन और सदाचार का विकास होता है।

सम्यक चारित्र का आधार है संयम

आचार्यश्री ने कहा कि जैन दर्शन में मोक्ष प्राप्ति के लिए सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र महत्वपूर्ण हैं। संयम साधना सम्यक चारित्र का आधार है।

जब व्यक्ति अपनी इच्छाओं और विषय-वासनाओं पर नियंत्रण रखते हुए आत्मस्वरूप की ओर अग्रसर होता है, तभी उसकी आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

आत्मचिंतन की ओर बढ़ें : मुनि उपशांतसागर

मुनि श्री 108 उपशांतसागरजी महाराज ने कहा कि इच्छाओं के पीछे निरंतर भागने वाला व्यक्ति वास्तविक संतोष प्राप्त नहीं कर सकता। इंद्रियों को विषयों से हटाकर आत्मचिंतन की ओर प्रवृत्त करना ही सच्ची साधना है।

उन्होंने कहा कि क्रोध के समय क्षमा, अहंकार के स्थान पर विनम्रता, छल के स्थान पर सरलता और लोभ के स्थान पर संतोष को अपनाना संयमित जीवन की पहचान है। श्रद्धालुओं से धर्मोपदेशों को दैनिक जीवन में उतारने का आह्वान किया गया।

प्रश्नमंच में उत्तरदाताओं का उत्साहवर्धन

धर्मसभा के पूर्व श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्यमह पूजन हुआ। नन्हीं बालिकाओं ने भक्तिमय भजनों से मंगलाचरण प्रस्तुत किया। आचार्यश्री अभिनंदनसागरजी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन समाजजनों ने किया। धर्मसभा का संचालन रविंद्र जैन ने किया।

प्रतिदिन संध्याकालीन सभा में डॉ. मनोज जैन के संचालन में प्रश्नमंच आयोजित हो रहा है। धार्मिक प्रश्नों के उत्तर देने वाले प्रतिभागियों को आकर्षक उपहार दिए जा रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, लकी ड्रॉ से चयनित उत्तरदाताओं को सम्मेदशिखरजी तीर्थ वंदना के लिए रेलवे स्लीपर क्लास टिकट भी प्रदान किया जा रहा है। प्रश्नमंच के बाद गुरु भक्ति और महाआरती होती है।

श्रीफल साथी : मनोज जैन नायक, मुरैना