महरौनी, ललितपुर। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज महरौनी में मंगलवार को परम तपस्वी, चतुर्थकालीन चर्याधारी पूज्य मुनि श्री विकौशलसागर महाराज के मंगल प्रवचन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुए। महाराज श्री के पावन सान्निध्य और मंगल वचनों से विद्यालय परिसर धर्ममय हो उठा।
नैतिक मूल्यों को जीवन में उतारने की प्रेरणा
मुनि श्री ने अपने प्रवचन में धर्म, संयम, अहिंसा, त्याग, तपस्या और सदाचार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण भी है। विद्यार्थियों को आध्यात्मिक संस्कारों तथा अनुशासन के साथ जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।
शिक्षा के साथ संस्कारों का समन्वय
आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना रहा। मुनि श्री के संदेशों ने विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना, आत्मानुशासन और जीवन-मूल्यों के प्रति समर्पण की प्रेरणा जगाई।
समाजजन और विद्यालय परिवार रहा उपस्थित
इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष पवन मोदी, शानू कठेरिया, नितिन जैन, मिलापचंद्र सर्राफ एवं महेंद्र जैन उपस्थित रहे। विद्यालय के प्रधानाचार्य ज्ञानेंद्र कुमार गुप्ता के नेतृत्व में समस्त आचार्यों एवं आचार्या बहनों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का संचालन नितिन शास्त्री ने किया। समापन पर विद्यालय परिवार ने मुनि श्री के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके आशीर्वचनों को अपना सौभाग्य बताया।
श्रीफल साथी : राजीव सिंघई, कुण्डलपुर




