जयपुर। राजस्थान जैन साहित्य परिषद, जयपुर की मासिक विचार गोष्ठी गुरुवार को श्री दिगम्बर जैन मंदिर, मोहनबाड़ी में आयोजित हुई। गोष्ठी का विषय ‘अनेकांतवाद और उसके अनुयायी: सिद्धान्त, व्यवहार और विरोधाभास’ था। युवा विद्वान पं. प्रद्युम्न कुमार जैन शास्त्री ने मुख्य वक्ता के रूप में विषय के विभिन्न पक्षों पर विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के शुभारंभ में दीप्ति जैन ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। सेठ छिदामीलाल जैन मंदिर, फिरोजाबाद के ट्रस्टी श्रेष्ठी राजीव पांड्या द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया तथा श्रेष्ठी कपूर चंद कसेरा मोहन बाड़ी परिवार द्वारा जिनवाणी विराजित की गई। राजस्थान जैन साहित्य परिषद के अध्यक्ष पदम जैन बिलाला ने विषय की वर्तमान में उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अनेकांतवाद जैन दर्शन का ऐसा महत्त्वपूर्ण सिद्धांत है, जो विचारों में उदारता, दृष्टिकोण में व्यापकता तथा व्यवहार में बदलाव लाने में सक्षम है। इधर, मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजेंद्र बिलाला ने अतिथियों का स्वागत किया।
संवाद की स्वस्थ परंपरा विकसित करने की जरूरत
मुख्य वक्ता पं. प्रद्युम्न कुमार जैन शास्त्री ने ‘अनेकांतवाद और उसके अनुयायी: सिद्धांत, व्यवहार और विरोधाभास’ विषय पर जैन आचार्यों के ग्रंथों का उद्धरण देते हुए सिद्धांत और व्यवहार के बीच सामंजस्य की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने अनेकांतवादी दृष्टिकोण के माध्यम से ऐसा ही है-ऐसा भी है जैसे विभिन्न विचारों को समझने तथा संवाद की स्वस्थ परंपरा विकसित करने की महत्ता पर प्रकाश डाला तथा आत्म निरीक्षण के लिए स्वयं से कुछ प्रश्नों का सुझाव दिया। परिषद के मंत्री महावीरकुमार चांदवाड़ ने परिषद की स्थापना, उद्देश्यों एवं अब तक की गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। गोष्ठी का एक विशेष आकर्षण ‘अभिनव प्रयोग’ रहा, जिसके अंतर्गत उपस्थित श्रोताओं में से डॉ. माधुरी जैन, राजकुमार बिल्टीवाला, महेंद्र सौगानी (चितावा), जेके जैन (जनकपुरी) सहित अनेक प्रबुद्धजनों ने सहभागिता की।
श्रोताओं ने परिषद की आजीवन सदस्यता ग्रहण की
कार्यक्रम में राजस्थान जैन साहित्य परिषद के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ स्थानीय जैन समाज के गणमान्यजनों, धर्मानुरागियों और साहित्यप्रेमियों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। परिषद के कोषाध्यक्ष प्रदुमन पाटनी ने बताया कि इस समय बहुत से स्थानीय श्रोताओं ने परिषद की आजीवन सदस्यता ग्रहण की। संचालन परिषद के संयुक्त मंत्री रमेश गंगवाल ने किया। परिषद के संयोजक सुदर्शन पाटनी ने सभी अतिथियों, मुख्य वक्ता, सहयोगियों एवं दूर दूर से आए सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
वैचारिक उदारता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण
कार्यक्रम के समापन पर वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित सभी जनों ने परस्पर आत्मीयता एवं सौहार्द के साथ सहभागिता की। मंदिर समिति के मंत्री नरेंद्र जैन, जैन पत्रकार महासंघ के मंत्री उदयभान बडजात्या तथा जैन बैंकर्स फोरम के मंत्री सुनील काला ने कहा कि परिषद की यह पहल साहित्यिक एवं दार्शनिक चेतना के विकास के साथ समाज में स्वस्थ संवाद, सहिष्णुता और वैचारिक उदारता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण रही।




