इंदौर। नेमी नगर जैन कॉलोनी स्थित घूंघट गार्डन में सोमवार को धर्मसभा में आचार्य श्री सुनीलसागरजी गुरुदेव ने कहा श्री जिनेंद्र भगवान की भक्ति जब मन खोलकर और हृदय से की जाती है तो उसका प्रभाव केवल हमारी भावनाओं पर ही नहीं, बल्कि हमारे जीवन और मन की स्थिति पर भी दिखाई देता है। भक्ति में वह शक्ति है, जो उदास मन को प्रसन्नता से भर देती है। कई बार व्यक्ति जिनालय में प्रवेश करते समय मन में अनेक चिंताएँ, दुःख और परेशानियाँ लेकर आता है, लेकिन प्रभु की आराधना, संतों के प्रवचन और भक्तिमय वातावरण में कुछ समय बिताने के बाद उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। आँखों में आँसू लेकर आने वाला भक्त भी वहाँ से आनंद और संतोष की अनुभूति लेकर लौटता है।

भक्ति के इसी आनंद और जीवन में उसके महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी अक्सर कहती है— Enjoy करो, एक ही Life है लेकिन, जीवन का वास्तविक आनंद केवल बाहरी मनोरंजन में नहीं, बल्कि मन की शांति और आत्मिक प्रसन्नता में है। आनंद का अर्थ यह नहीं कि जीवन में क्लेश बढ़ जाएँ, विकारों को प्रोत्साहन मिले, कषाय तीव्र हों और वासनाएँ मन पर हावी हो जाएँ। वास्तविक आनंद वह है, जो हमें भीतर से प्रसन्न बनाए, नकारात्मक भावों को कम करे और जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करे।

श्रद्धालुओं ने प्रभु की आराधना में सहभागिता की

यदि जीवन को आनंदपूर्वक जीने का वास्तविक तरीका अनुभव करना है, तो धर्म, भक्ति और आध्यात्मिकता से जुड़ना होगा। इसके लिए श्री जिनेंद्र भगवान की आराधना, जिनालय में उपस्थिति, संतों के प्रवचन का श्रवण और धार्मिक आयोजनों में सहभागिता महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं। सन्मति समवशरण में आकर तथा इंद्रध्वज महामंडल विधान में सहभागी बनकर भक्त भक्ति, श्रद्धा और आत्मिक आनंद की इस अनुभूति को करीब से अनुभव कर रहे हैं। इसी भक्तिमय वातावरण के बीच इंद्रध्वज महामंडल विधान का नौवाँ दिन अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। सन्मति समवशरण में श्रद्धालुओं ने प्रभु की आराधना में सहभागिता की और भक्ति के रंग में रंगकर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। पूरे आयोजन में धर्ममय वातावरण और प्रभु के प्रति समर्पण की भावना दिखाई दी।

जीवन का सच्चा आनंद क्षणिक सुखों में नहीं

इंद्रध्वज महामंडल विधान का यह आयोजन श्रद्धालुओं को संदेश दे रहा है कि जीवन का सच्चा आनंद क्षणिक सुखों में नहीं, बल्कि मन की निर्मलता, कषायों पर नियंत्रण, आत्मिक शांति और प्रभु की भक्ति में निहित है। जब जीवन भक्ति से जुड़ता है, तो कठिन परिस्थितियों के बीच भी मुस्कुराने की शक्ति मिलती है और आनंद की एक नई परिभाषा सामने आती है।