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कुण्डलपुर (दमोह)। सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में बड़े बाबा की पावन धरा पर आयोजित गुरु परंपरा समर्पण समारोह में संतों ने गुरु निष्ठा, विनय, त्याग और समर्पण का संदेश दिया। देश के विभिन्न नगरों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने वर्तमान संघनायक आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के प्रति श्रद्धा अर्पित करते हुए गुरु परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

गुरु विचारों को जीवन में उतारने का संकल्प

राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ एवं कुण्डलपुर क्षेत्र प्रचारमंत्री जयकुमार जैन ‘जलज’ ने बताया कि समारोह का उद्देश्य गुरु उपकारों का स्मरण करने के साथ उनके आदर्शों को व्यवहार में उतारने का संकल्प लेना है।

निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने कहा कि गुरु परंपरा केवल आयोजन अथवा परंपरा का नाम नहीं है, बल्कि गुरु के विचारों, साधना, आदर्शों और समाजहित के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प है।

सेवा और स्वावलंबन के प्रकल्पों का स्मरण

मुनि श्री ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मार्गदर्शन में हथकरघा, भाग्योदय, पूर्णायु, दयोदय महासंघ गौशाला, शांतिधारा दुग्ध योजना और प्रतिभास्थली जैसे प्रकल्प सेवा, स्वावलंबन और संस्कारों के केंद्र बने।

उन्होंने कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा केवल शब्दों से व्यक्त नहीं होती, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने और उनके उद्देश्यों को जीवन में उतारने से सार्थक होती है।

साधकों और दानवीर परिवारों का सम्मान

समारोह में गुरु के मिशन के लिए निःस्वार्थ सेवाएं देने वाले ब्रह्मचारी भाई-बहनों, त्यागीवृत्ति के लोगों, गृहस्थ कार्यकर्ताओं और दानवीर परिवारों का सम्मान किया गया। मुनि श्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में सेवा करने वाले इन साधकों ने कभी नाम, पद अथवा प्रतिष्ठा की अपेक्षा नहीं रखी।

सम्मानित व्यक्तियों को चंदन लगाकर अभिनंदित किया गया, प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए तथा गुरु के नाम पर पौधे भेंट किए गए। पौधों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

विनय और अनुशासन को बताया गुरु भक्ति का आधार

मुनि श्री पवित्रसागर जी महाराज ने कहा कि गुरु का सान्निध्य जीवन को सही दिशा देता है। शिष्य को गुरु की शिक्षाओं को केवल सुनना नहीं, बल्कि अपने आचरण में उतारना चाहिए। कठिन समय में भी गुरु के प्रति निष्ठा बनाए रखना ही सच्चे समर्पण की पहचान है।

ऐलक श्री निश्चयसागर जी महाराज ने कहा कि गुरु के उपकारों का स्मरण, उनके आदर्शों का अनुसरण और मार्ग से विचलित न होना ही सच्ची गुरु भक्ति है। ऐलक श्री तन्मयसागर जी महाराज ने गुरु के उपदेश को आदेश मानकर स्वीकार करने को समर्पण का स्वरूप बताया।

झांकी और निबंध प्रतियोगिताओं के परिणाम

समारोह में विभिन्न नगरों से 40 से अधिक झांकियां प्रदर्शित की गईं। निबंध प्रतियोगिता में एक हजार से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिनमें विदेश से भी निबंध शामिल रहे। योग्य प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए।

इस अवसर पर कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ, पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में गुरु भक्त उपस्थित रहे।

श्रीफल साथी : राजीव सिंघई, कुण्डलपुर