कुचामन सिटी। दिगंबर जैन धर्मावलंबियों के आत्मशुद्धि, संयम, त्याग एवं सद्गुणों की साधना के पावन दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत शुक्रवार को उत्तम आर्जव धर्म की श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ पूजा-अर्चना एवं विधान किया गया।

डीडवाना रोड स्थित श्री 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में श्रावकों ने श्रीजी का कलशाभिषेक कर पुण्यार्जन किया। अभिषेक एवं शांतिधारा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिभाव से गूंज उठा।

मन में कुछ और, वचन-कर्म में कुछ और न हो

उत्तम आर्जव धर्म जीवन में छल-कपट का त्याग कर विचार, वाणी और कर्म में एकरूपता तथा मन, वचन और काय में सरलता अपनाने की प्रेरणा देता है।

आर्जव अर्थात सरलता—मन में कुछ और, वचन में कुछ और और कर्म में कुछ और न हो, बल्कि तीनों में पवित्रता और एकरूपता हो। दशलक्षण धर्म में आर्जव को निष्कपट और सहज जीवन की साधना के रूप में समझाया गया है।

चार परिवारों को मिला शांतिधारा का पुण्यार्जन

उत्तम आर्जव धर्म के दिन शांतिधारा का पुण्यार्जन रामेश्वर लाल-सुशील कुमार गगवाल परिवार, महावीर प्रसाद-पंकज-संतोष काला परिवार, विनय कुमार-क्षितिज कुमार गगवार परिवार तथा शांति देवी-भागचंद-अशोक कुमार अजमेरा परिवार को प्राप्त हुआ।

भजनों के बीच हुई दशधर्म विधान की आराधना

नवीन काला ने बताया कि संगीतकार पदमेश भरतपुर टीम के सुमधुर भजनों एवं भक्तिमय प्रस्तुतियों के बीच देव-शास्त्र-गुरु पूजा, समुच्चय चौबीस पूजा, सोलहकारण पूजा, पंचमेरु पूजा और दशधर्म पूजा की गई।

दशधर्म विधान के अंतर्गत उत्तम आर्जव धर्म की विशेष आराधना हुई। मूलनायक भगवान महावीर स्वामी की विशेष पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से अर्घ्य समर्पित किए।

आरती, सामायिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

सायंकाल भगवान की आरती, सामायिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें श्रावक-श्राविकाओं के साथ बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता कर धर्मलाभ लिया।

मार्दव धर्म पर इन परिवारों ने किया था पुण्यार्जन

उत्तम मार्दव धर्म के दिन शांतिधारा का पुण्यार्जन लालचंद-जितेंद्र-नीरज पहाड़िया परिवार, विमल कुमार-नवीन पाटोदी परिवार, लालचंद-अनीष-मनीष अजमेरा परिवार तथा महेंद्र कुमार-विशाल-पारस पहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ।

मंदिर समिति ने धार्मिक आयोजन में सहभागी सभी श्रावक-श्राविकाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए साधुवाद दिया।