धरियावद। परम पूज्य वात्सल्य निधि आचार्य कल्प श्री पुण्यसागर जी महाराज की संघस्थ क्षुल्लिका सुवर्णमती माताजी का आज प्रातः साढ़े पांच बजे णमोकार मंत्र के पावन उच्चारण के बीच सम्यक समाधि पूर्वक मरण हो गया। उनके समाधि मरण का समाचार मिलते ही धरियावद सहित जैन समाज में शोक की लहर छा गई।
गृहस्थ जीवन के दायित्व पूरे कर अपनाया संयम मार्ग
क्षुल्लिका सुवर्णमती माताजी संघस्थ बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी जी की गृहस्थ अवस्था की माताजी थीं। उनका मूल निवास घाटोल, जिला बांसवाड़ा रहा। उन्होंने गृहस्थ जीवन के पारिवारिक दायित्वों को पूर्ण करने के बाद लगभग चार वर्ष पूर्व सोनागिरि में परम पूज्य आचार्य श्री कल्प पुण्यसागर जी महाराज के कर-कमलों से दीक्षा ग्रहण कर संयम मार्ग अपनाया था।
अंतिम क्षणों तक धर्म-साधना में रहीं लीन
दीक्षा के बाद क्षुल्लिका सुवर्णमती माताजी ने संयम, साधना एवं धर्माराधना को अपने जीवन का आधार बनाया। जीवन के अंतिम क्षणों तक उन्होंने धार्मिक साधना करते हुए णमोकार मंत्र के पावन स्मरण के साथ सम्यक समाधि को प्राप्त किया।
श्रद्धा के साथ निकली डोली यात्रा
माताजी की डोली यात्रा आज प्रातः साढ़े दस बजे महावीर वाटिका से मोक्षधाम के लिए निकली। डोली यात्रा में धरियावद सहित उदयपुर, घाटोल, थानला, मध्यप्रदेश आदि विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं एवं भक्तजन पहुंचे।
भक्तिभाव से शामिल हुए समाजज
डोली यात्रा में समाजजनों एवं श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण सहभागिता की। भक्तों ने क्षुल्लिका सुवर्णमती माताजी के संयममय जीवन को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वातावरण में धार्मिक भाव और साधनामय जीवन के प्रति श्रद्धा का भाव दिखाई दिया।
समाधिमरण को बताया प्रेरणादायी परिणति
समाजजनों ने माताजी के संयममय जीवन एवं धर्म-साधना को स्मरण करते हुए उनके समाधिमरण को धर्म एवं साधना के मार्ग की प्रेरणादायी परिणति बताया। उनके जीवन से गृहस्थ जीवन के दायित्वों के बाद संयम एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
26 अगस्त को श्रद्धांजलि सभा
क्षुल्लिका सुवर्णमती माताजी की श्रद्धांजलि सभा 26 अगस्त 2026, बुधवार को सुबह 9:30 बजे पुण्यसागर सभागार, महावीर वाटिका में आयोजित की जाएगी। समाजजनों एवं श्रद्धालुओं से श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित होकर माताजी के प्रति श्रद्धा अर्पित करने का आग्रह किया गया है।






