इंदौर। श्रावक संस्कार शिविर एवं दशलक्षण पर्व के उत्तम तप धर्म के अवसर पर मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर महाराज ने विद्यासुधा देशना मंडप में कहा कि जीवन में ऊंचा उठना है तो पहले झुकना सीखना होगा। विनम्रता कमजोरी नहीं, बल्कि महान बनने की पहली सीढ़ी है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति जब कुछ बनने की इच्छा करता है, तभी उसे सबसे अधिक सावधान रहना चाहिए। दूसरों से तुलना ही हीनता, असंतोष और अहंकार को जन्म देती है। दुनिया को पीछे छोड़ने तथा दूसरों को छोटा समझने की भावना पतन का कारण बनती है।
बीज की तरह झुकने से मिलती है ऊंचाई
मुनिश्री ने बीज का उदाहरण देते हुए कहा कि वृक्ष बनने से पहले बीज को मिट्टी के अंधकार में जाना और नीचे दबना पड़ता है। तभी वह आकाश की ऊंचाई छू पाता है।
उन्होंने कहा, “जो बड़े लोगों से नीचे रहना सीखता है, वही एक दिन बड़ा बनता है।”
आराम और सुख में अंतर समझें
महाराजश्री ने कहा कि मनुष्य रोटी, पानी, धन, मकान और वाहन में सुख खोजता है, जबकि ये केवल आराम देते हैं, सुख नहीं। वस्तु चली जाए तो आराम भी समाप्त हो जाता है। जो सुख बाहरी वस्तुओं पर निर्भर है, वह वास्तविक सुख नहीं है।
उन्होंने कहा, “तुम्हें सुखी बनना नहीं है, तुम सुखी हो।” अपने शुद्ध आत्मस्वरूप को पहचानें और यह भावना करें कि मैं शुद्ध हूं, मैं ज्ञायक स्वरूप हूं। वास्तविक आनंद हमारे भीतर है।
तीर्थंकर का वैभव नहीं, उपदेश देखें
मुनिश्री ने कहा कि भगवान की वंदना उनके वैभव के लिए नहीं, बल्कि उनके बताए मोक्षमार्ग पर चलने के लिए होनी चाहिए। तीर्थंकर के पास क्या है, यह देखने की अपेक्षा तीर्थंकर क्या कह रहे हैं, इसे समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि समवशरण के वैभव पर ललचाने के बजाय भगवान के उपदेश पर जीवन समर्पित करना चाहिए। भगवान का बाहरी स्वरूप इंद्रियों से दिखता है, लेकिन अर्हंत स्वरूप को समझने के लिए आगम दृष्टि आवश्यक है।
गुरु के पीछे नहीं, मार्ग पर चलें
मुनिश्री ने कहा कि साधु का संग जीवन को बनाता है और गुरु का मार्गदर्शन जीवन को बदलता है। इसलिए साधु के प्रति श्रद्धा तथा गुरु के प्रति आज्ञापालन होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सबसे पहले स्वयं से पूछना चाहिए—मैं कौन हूं? जब वह यह स्वीकार करता है कि मुझे स्वयं के बारे में नहीं मालूम, तभी आत्मज्ञान की खोज शुरू होती है। धर्म का लक्ष्य बाहरी पद-प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि सम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र के माध्यम से आत्मकल्याण है।
धर्मसभा में रहे उपस्थित
धर्मसभा में चक्रवर्ती सपना-मनीष गोधा, अध्यक्ष नवीन-आनंद गोधा, अशोक डोशी, हर्ष जैन, हुकुम काका, विजय धुर्रा, ब्रह्मचारी प्रदीप भैया एवं पारस भैया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
श्रीफल साथी : राजेश जैन दद्दू, इंदौर





