इंदौर। दलालबाग स्थित विद्या सुधा देशना मंडप में मुनि सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु की वाणी सुनना श्रद्धा है, लेकिन उस वाणी को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धा है।

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनिश्री ने धर्म को केवल सुनने या प्रभावित होने तक सीमित न रखने, बल्कि उसे व्यवहार और संस्कारों में उतारने की प्रेरणा दी।

धर्म के प्रति अलग-अलग दृष्टिकोण

मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य जीवन में अनेक बातें सुनता, देखता और परखता है। संसार में कई लोग कुछ कहते हैं और कुछ करते हैं, इसलिए विवेक आवश्यक है। किंतु धर्म, गुरु और जीवन के मूल संस्कारों के विषय में केवल सुनना पर्याप्त नहीं है; उन्हें आचरण में उतारना ही वास्तविक धर्म है।

उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति धर्म को सुनकर अपनाता है, कोई अपनी परेशानी दूर करने के लिए, कोई इच्छापूर्ति की आशा से और कोई धर्म के वास्तविक स्वरूप को जीवन का आधार बनाकर स्वीकार करता है।

मूल संस्कारों में सुविधा का बहाना नहीं

परीक्षा का उदाहरण देते हुए मुनिश्री ने कहा कि जैसे कुछ प्रश्न अनिवार्य होते हैं और छोड़े नहीं जा सकते, वैसे ही धर्म में भी कुछ बातें अनिवार्य हैं। तप और उपवास अपनी शक्ति के अनुसार किए जा सकते हैं, लेकिन गलत आदतों और नशे से दूर रहना, माता-पिता का सम्मान करना तथा गुरु आज्ञा का पालन करना जीवन के मूलभूत संस्कार हैं।

उन्होंने कहा कि इन आवश्यक संस्कारों के पालन में शक्ति या सुविधा का बहाना नहीं चलना चाहिए।

गुरु आज्ञा पर अमल ही सच्ची श्रद्धा

मुनिश्री ने कहा कि गुरु के उपदेश को विवेक से ग्रहण किया जा सकता है, लेकिन जब गुरु किसी बात को अपनी इच्छा या आदेश के रूप में कहें, तब शिष्य को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह कर पाएगा या नहीं। सच्ची श्रद्धा गुरु की बात को जीवन में उतारने के भाव में है।

उन्होंने कहा, “धर्म को केवल सुनना धर्म नहीं है, धर्म को समझकर अपने आचरण में उतारना ही वास्तविक साधना है।”

धर्मसभा में सहभागिता

धर्मसभा में चक्रवर्ती अध्यक्ष सपना-मनीष गोधा, आनंद-नवीन गोधा, अशोक डोशी, महामंत्री हर्ष जैन, आकाश आलोक कोल, डॉ. जैनेन्द्र जैन, प्रिंसिपल टोंगिया, संजय पाटोदी, अक्षय कासलीवाल, धर्मेंद्र जैन, गिरीश जैन ‘गिन्नी’, प्रदीप, पारस ब्रह्मचारी, विनोद जी भैया सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी समाजजन उपस्थित रहे।

श्रीफल साथी : राजेश जैन दद्दू, इंदौर