इंदौर। जैसे-जैसे दशलक्षण पर्व अपनी पूर्णता की ओर अग्रसर हो रहा है। वैसे-वैसे भक्ति और आराधना के लिए श्रावक-श्राविकाओं में उल्लास बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को भी कंचनबाग स्थित समवशरण मंदिर में नित्य पूजन, अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य समर्पण, पाठ और स्वाध्याय का दौर रहा। कंचनबाग में विराजमान आर्यिका सुदृढ़मति माताजी और आर्यिका सुलेखमति माताजी के सानिध्य में दशलक्षण पर्व पर दिव्य प्रवचन की श्रृंखला नित चल रही है। मंगलवार को आर्यिका सुदृढ़मति माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में तप का बहुत महत्व है। इसके माध्यम से एक अंतर मुहूर्त में सीधा ऊपर पहुंच जाएंगे। उसके लिए छोटी-छोटी चीज जरूर करें। उन्होंने कहा कि यह उत्सव ध्यान आदि प्रेक्टिस से बाकी रोज जो होता रहे अपने साथ जो कर्मों का उदय आए उसको शांति से, समता से भोगते रहना। आर्यिका सुदृढ़मति माताजी ने कहा कि आज की बात करते हैं। आज क्या संकल्प लेंगे। उन्होंने कहा कि एक टेढ़ा संस्कार पहचान लेना अपना। अपनी पूछ भी तो टेढ़ी है। संस्कार भी होगा। कई जन्मों का, इस जन्म का। इसके बिना नहीं चला जा सकता। यह तो ऐसी चीज है कि टेढ़ी रहती है। एक टेढ़े संस्कार को पहचान कर कोई भी एक तप 12 में से जो आपको अच्छा लगे उसे बस लगातार करना।

एक रस का त्याग करो और एक प्रेक्टिस आज जरूर करना

माताजी ने आगे कहा कि अपन एक-दो दिन दवाई लें फिर कोई फर्क नहीं पड़ा। कोई फर्क नहीं पड़ा तो नहीं होगा। बीमारी लंबी हो, पुरानी हो तो थोड़े लंबे टाइम तक दवाई लेनी पड़ती है तो जो भी एक फेवरेट तप हो लो या रोज वाले चेंज कर करके भी एक आ जाइए। आज यह तप किया कल वह तप किया पर रोज एक तपस्या कोई ना कोई एक तरफ अपन इन 12 में से अपनाएंगे। यह तो रोज का काम हो गया। आज क्या करेंगे स्पेशली? क्या करोगे आज स्वाध्याय तो हो गया इसमें से कोई भी एक रस का त्याग करके देखना। अभी कौन-कौन से नहीं, नमक, शक्कर, घी, तेल, दूध का।

5 या 10 मिनट का संकल्प लें

उन्होंने कहा कि हम संकल्प तो नहीं करते हैं। हम भी नहीं खाएंगे आप भी मत खाना, जो शुरुआत करो संकल्प की। एक रस का त्याग करो और एक प्रेक्टिस आज जरूर करना। अंतरंग तप में भी स्वाध्याय हो चुका है। बाकी कुछ करना हो तो बाई और अंतरंग का कंबीनेशन एक प्रेक्टिस बताते हैं। 5 से 10 मिनट की। जिसमें शारीरिक और मानसिक दोनों तप आ जाएंगे। ऐसी प्रेक्टिस बता रहे हैं। एक आसान से बैठेंगे, वैसे ही बैठे रहना। 5 या 10 मिनट का संकल्प है ना। इस आसन से रहना फिर दर्द होने लगे नहीं समझ में आए तो भी काय क्लेश तप के माध्यम से णमोकार मंत्र जाप करो।

मेहमानों के उदाहरण से सुख-दुख में तप को श्रेष्ठ बताया

प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी प्रैक्टिस करते रहना। माताजी ने एक उदाहरण के साथ प्रवचन को विराम दिया कि घर में मेहमान आते हैं। मामा चाचा और कभी-कभी जमाई राजा भी आते हैं। दोनों क्या एक रूप से मतलब एक विकल्प टेंशन या ट्रीटमेंट जो देना पड़ता है। एक जैसा होता है क्या? सब्जी बना लो, मतलब रोटी दो सब्जी बना दी। ठीक है ज्यादा बहुत वह नहीं किया। सत्कार और सब चीज तो इट्स ओके चल जाता है ना चल जाता है और कुछ नहीं भी करो तो मामा आएंगे जाते-जाते बच्चे के हाथ में लिफाफा दे जाएंगे और जमाई राजा आएंगे तो आप लोग को टेंशन है मीठा बनाना, नमकीन बनाना, यह करना होगा, फिर उनके लिए तिलक लगाना, फिर इतना खिलाओ-पिलाओ तो भी सामने से लिफाफा देना। कितना सब करना पड़ता है, इसी तरह सुख आए या दुख तो समझना है किसने बांधा है मैं नहीं बंधता है तो कैसे-कैसे चुपचाप करेंगे।

ऐसे सीधे हो जाएं कि सीधे सिद्ध बनने में हम और आपको देर नहीं लगे

अब जो लेनदेन होगा, वह लेनदेन दोनों की तपस्या कहते हैं जो आया जब जैसा आया उसको परम स्वीकार करो। पुराना अगर दिल से जाएंगे तो नया आएगा। नहीं जो पुराना भर के रखा है। वह भी निर्जरा हो कर एक दिन उसे परम तत्व को अपन सभी प्राप्त हो जाएंगे तो इसी मंगल भावना के साथ की अपने सारे संस्कार ऐसे सीधे हो जाएं ऐसे सीधे हो जाएं कि सीधे सिद्ध बनने में हम और आपको देर नहीं लगे। संचालन सुरभि पहाड़िया ने किया। साथ ही इस अवसर पर हसमुख गांधी, सुमत लुहाड़िया, एमके जैन एलआईसी, सतीश भुच, प्रदीप पंचोलिया, जितेंद्र जैन, समीर जैन, डॉ. अरविंद जैन, अजीत जैन सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।

इनके सहयोग से हो रहे हैं कार्यक्रम

सुरभि पहाड़िया ने बताया कि यहां पर नित्य विविध कार्यक्रम श्री दिगंबर जैन उदासीन श्राविकाश्रम ट्रस्ट, दिगंबर जैन समवशरण तुकोगंज ट्रस्ट, जैन समवशरण ग्रुप, महिला मंडल कंचनबाग, बहुमंडल कंचनबाग की ओर से संचालित और आयोजित किए जा रहे हैं। मंगलवार की आरती का सौभाग्य सभी बीड़ी वाला परिवार की ओर लिया गया।