धरियावद। दिगंबर जैन समाज में बुधवार से दस दिवसीय दशलक्षण महापर्व का भक्ति और धर्माराधना के साथ शुभारंभ हुआ। आचार्य श्री कल्प पुण्यसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में मनाए जा रहे इस महापर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म की आराधना की गई। सुबह महावीर स्वामी मंदिर में पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन हुआ। वहीं पुण्यसागर सभागार में चल रही 48 दिवसीय भक्तामर महाआराधना के 47वें दिन विधान एवं पर्व पूजन के साथ धर्ममय वातावरण बना रहा। आचार्य श्री ने उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन करते हुए कहा कि प्रत्येक प्राणी को अपने हृदय और भावों में क्षमा का भाव धारण करना चाहिए। क्षमा केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और मन की निर्मलता का मार्ग है। मन में वैर, क्रोध और कटुता रखने के बजाय क्षमा को जीवन का हिस्सा बनाने से आत्मिक शांति की अनुभूति होती है।

गुरुवार को विश्व शांति महायज्ञ से भक्तामर आराधना का समापन

पुण्यसागर सभागार में चल रही 48 दिवसीय भक्तामर महाआराधना का गुरुवार को अंतिम दिन होगा। 48वें दिन हवन-पूर्णाहुति एवं विश्व शांति महायज्ञ के साथ इस भव्य आराधना का समापन किया जाएगा। आचार्य श्री कल्प पुण्यसागर जी महाराज के ससंघ सान्निध्य में, बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी के निर्देशन तथा पंडित हसमुख जैन के मार्गदर्शन में 48 दिनों तक चली इस आराधना में धरियावद के साथ दूर-दराज क्षेत्रों से आए श्रावक-श्राविकाओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिदिन भक्तामर के काव्यों के अनुरूप अर्घ्य समर्पण, पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठानों से पुण्यसागर सभागार भक्तिभाव से सराबोर रहा।

प्रेमलता देवी ने लिया आर्यिका दीक्षा का संकल्प बनीं श्रद्धामति माताजी

धर्माराधना के इस पावन अवसर पर बुधवार को दोपहर 2 बजे एक और महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रसंग सामने आया। मुंगेर निवासी प्रेमलता देवी ने आचार्य श्री के समक्ष आर्यिका दीक्षा ग्रहण की। पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहीं प्रेमलता देवी एवं उनके परिवारजनों ने गुरुदेव से दीक्षा प्रदान करने की विनती की थी। गुरुदेव की स्वीकृति के बाद आज चतुर्विध संघ एवं बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं की मौजूदगी में उन्हें आर्यिका दीक्षा प्रदान की गई। दीक्षा उपरांत उन्हें आर्यिका श्रद्धामति माताजी नाम प्राप्त हुआ। दीक्षा समारोह के दौरान वातावरण श्रद्धा और वैराग्य के भावों से भर उठा।

शाम को सामूहिक सामायिक-प्रतिक्रमण

दशलक्षण महापर्व के तहत प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी रहेगी। शाम 7 बजे सामूहिक सामायिक एवं प्रतिक्रमण होगा। इसके बाद आरती, शास्त्र स्वाध्याय तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाएंगे। दस दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में उत्तम क्षमा सहित दशलक्षण धर्म के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाएगी।