लोनारा। मृत्यु जीवन का अंतिम सत्य है, लेकिन कुछ लोग अपने जाने के बाद भी मानवता की सेवा करते रहते हैं। ग्राम लोनारा के समाजसेवी स्वर्गीय रमेशचंद जैन ने देहदान कर ऐसी ही अनुकरणीय मिसाल पेश की है। गांव के इतिहास में पहली बार हुए इस देहदान ने मानव सेवा की नई परंपरा शुरू की है। रमेशचंद जैन का 30 अक्टूबर को निधन हो गया था। उनके संकल्प और परिजनों की सहमति से 31 अक्टूबर को उनकी पार्थिव देह चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए अरविंदो मेडिकल कॉलेज इंदौर को समर्पित की गई। अब उनकी देह चिकित्सा विद्यार्थियों के अध्ययन और शोध में उपयोगी होगी। उनके नेत्र जिला चिकित्सालय खरगोन, त्वचा टी चोइथराम हॉस्पिटल इंदौर और देहदान अरविंदो मेडिकल कॉलेज इंदौर में किया गया। देहदान से पूर्व बाजार चौक पर ग्रामीणों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार ऊन थाना प्रभारी टीआई दिनेश सोलंकी के नेतृत्व में पुलिस ने देहदानी स्वर्गीय रमेशचंद जैन की पार्थिव देह को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने 'रमेश भाई अमर रहें' के नारे लगाकर उन्हें भावभीनी विदाई दी।
देहदान से मृत्यु के बाद भी समाज की सेवा संभव

वरिष्ठ समाजसेवी राजेन्द्र जैन महावीर, सनावद ने कहा कि स्वर्गीय रमेशचंद जैन का देहदान मानवता की सच्ची सेवा है। मनुष्य का जीवन समाप्त हो सकता है, लेकिन उसके सत्कर्म सदैव जीवित रहते हैं। देहदान ऐसा महादान है, जिसके माध्यम से व्यक्ति मृत्यु के बाद भी समाज के काम आता है। राजेन्द्र जैन महावीर ने कहा कि देहदान से रमेशचंद जैन लोनारा के इतिहास में अमर हो गए, पुत्र आशीष और अमित ने सामाजिक दायित्व निभाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में अन्नदान, वस्त्रदान, औषधिदान और ज्ञानदान की गौरवशाली परंपरा रही है। इसी कड़ी में देहदान और अंगदान मानव कल्याण के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। देहदान से चिकित्सा विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना का व्यावहारिक ज्ञान मिलता है, वहीं अंगदान जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवन की नई उम्मीद बन सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी देहदान और अंगदान को लेकर अनेक भ्रांतियां और संकोच हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के समाजसेवी रमेशचंद जैन का यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को परोपकार और मानव सेवा की प्रेरणा देगा। देहदान के माध्यम से वे लोनारा के इतिहास में अमर हो गए हैं।
देहदान के प्रेरणास्रोत सुनील जैन ईशान ने कहा कि रमेशचंद जैन भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन चिकित्सा शिक्षा के माध्यम से मानवता की सेवा में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने बताया कि मुस्कान ग्रुप के सांदीपन आर्य के विशेष सहयोग से यह पुनीत कार्य संपन्न हो सका।जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष जगदीश पटेल ने कहा कि रमेशचंद जैन का देहदान समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ ही दूसरे परिवारों को भी इस दिशा में आगे आने के लिए प्रेरित करेगा।
पुत्र आशीष और अमित ने पिता की इच्छा को दिया सम्मान
पिता के निधन की दुखद घड़ी में भी उनके पुत्र आशीष जैन और अमित जैन ने मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय दिया। देहदान की पूरी प्रक्रिया में धर्मपत्नी प्रमिला जैन, पुत्र आशीष-सारिका जैन और अमित-प्रतीक्षा जैन, भाई सुरेन्द्र जैन, नरेन्द्र हैं,बसंत जैन, राजेन्द्र जैन, बहन सुभद्रा जैन , जीवनलता जैन , रंजन जैन शाश्वत जैन, डॉ आकांक्षा जैन, अमीक्षा जैन, मोक्ष जैन की भूमिका सराहनीय रही। आशीष जैन पत्रकारिता के साथ युवा समाजसेवी के रूप में भी सक्रिय हैं। परिवार का यह निर्णय बताता है कि सेवा और परोपकार के संस्कार पीढ़ी-दर-पीढ़ी समाज को नई दिशा दे सकते हैं। उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय रमेशचंद जैन की पोती डॉ. आकांक्षा जैन भी आयुर्वेद स्नातक (बीएएमएस) हैं।
श्रद्धांजलि देने उमड़ा ग्रामीणों का हुजूम
ग्राम लोनारा में हुए इस ऐतिहासिक देहदान के अवसर पर जगदीश पटेल, जनपद अध्यक्ष संतोष पंवार, जगदीश खाटरिया, महेश मुकाती, गजा भाई पटेल, शंकर मेडिकल राजेन्द्र जैन महावीर, मुकेश जैन पेप्सी, लोकेंद्र शाह, अंतिम जैन, संदीप जैन, मोहन पटेल, उमा महाजन, सेवक पटेल, डॉ. राधेश्याम पटेल, शिवराम आडवाणी, महिमाराम साईंखेड़िया और ललित पटेल, बद्री मुकाती,रमेश पटेल,मंशाराम मुकाती,सचिन जैन,सुनील जैन, विपिन जैन, जंबू जैन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी ने स्वर्गीय रमेशचंद जैन के इस पुनीत कार्य की सराहना करते हुए इसे मानवता के लिए प्रेरणादायी बताया। ग्रामीणों का कहना था कि गांव में पहली बार हुआ यह देहदान आसपास के ग्रामीण अंचलों में भी जनजागरण का माध्यम बनेगा। स्वर्गीय रमेशचंद जैन का देहदान समाज को यह संदेश दे गया कि मृत्यु शरीर का अंत है, लेकिन सेवा, त्याग और परोपकार के माध्यम से मनुष्य मृत्यु के बाद भी मानवता के लिए उपयोगी बना रह सकता है।




