प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी, आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी सहित 55 से अधिक साधुओं का लघु कुंभ पदमपुरा में विराजित है। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर...
पदमपुरा। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी, आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी सहित 55 से अधिक साधुओं का लघु कुंभ पदमपुरा में विराजित है। मंगलवार को धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि संसारी प्राणी संसार का नाश अर्थात जन्म मरण से छुटकारा चाहता है। भावना भव नाशिनी होती है भाव से भव सुधरता है, भव संसार का नाश होता है। उसके लिए 12 भावना, 16 कारण भावना का वर्णन शास्त्रों में बताया गया है। भावना वैराग्य की करना चाहिए। उसके बिना धर्म कार्य का फल नहीं मिलता है। संसार ,शरीर, विषय भोगों से विरक्ति लेना चाहिए। बुराई छोड़ने से और छोटे-छोटे निर्मित पाकर वैराग्य प्रकट होता है।
साधुओं के उपदेश मनोरंजन में भी रहस्य और संदेश समाहित होता हैआचार्य श्री ने धर्मदेशना में बताया कि चक्रवर्ती जो कि 6 खंड का अधिपति हैं। वह भी हर समय वैराग्य का चिंतन करते हैं। उन्होंने धर्म का, भक्ति का सार को, आत्मा को समझा। 24 तीर्थंकरों ने जो कुछ जीवन में प्राप्त किया, वह दिव्य ध्वनि से हमें दिया है। साधुओं के उपदेश मनोरंजन में भी रहस्य और संदेश समाहित होता है, उससे जीवों का कल्याण होता है भावना संसार में पतन या उन्नति दोनों करती है यह संसार असार है, अशरण है, अनित्य है। केवल धर्म ही मंगलकारी शरणभूत है। धर्म को धारण करने से परमात्मा पद मिलता है, साधुओं के प्रवचन उपदेश को श्रवण कर उसके मर्म को समझ कर जीवन में उन्नति करना चाहिए़। इसके पूर्व मंगलाचरण चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन के बाद आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने तीनों आचार्यों, मुनिराजों, साधुओं का गुणानुवाद किया। आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी ने पुण्य, समय और मृत्यु का की विवेचना श्लोक से की।
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से सलूंबर के दंपति ने दीक्षा का किया निवेदनआचार्य श्री प्रज्ञासागर जी ने भाइयों के प्रेम, विनम्रता, बड़प्पन के आदर्श श्री प्रसन्न सागर जी को निरूपित किया। पाप छोड़कर पुण्य ग्रहण करो। संतों के सानिध्य में आकर छोटे-छोटे नियम लेने बुराई छोड़ने पर भी उनका दर्शन करना सार्थक होगा। दोनों आचार्यों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर आचार्य भक्ति परिक्रमा पूर्वक की। मंगलवार को पदमपुरा से आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी का संघ सहित चाकसू के लिए मंगल विहार हुआ। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को सलूंबर के दंपति 8 प्रतिमाधारी हुकमीचंद एवं उनकी धर्मपत्नी कांतादेवी 7 प्रतिमाधारी ने दीक्षा के लिए निवेदन कर श्रीफल समर्पित किया। वही अन्य श्रावक ने भी व्रत नियम ग्रहण किए।




