मुरैना। आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के पावन सान्निध्य में 24 एवं 25 अगस्त को राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दिल्ली के ऋषभ विहार में 24 एवं 25 अगस्त को आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद (पंजी.) के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष अधिवेशन का आयोजन किया जाएगा। अधिवेशन का उद्देश्य जैन धर्म की अनुपम विद्या जैन ज्योतिष को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करना तथा इसके वैज्ञानिक एवं शोधपरक पक्षों को व्यापक मंच प्रदान करना है।

अधिवेशन में ग्वालियर के जाने-माने ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन भी भाग लेंगे। वे इस अवसर पर जैन ज्योतिष के विभिन्न पहलुओं पर आधारित अपना शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। अपने शोध पत्र में वे ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से चर-अचर वस्तुओं पर पड़ने वाले प्रभाव के साथ वर्षा, भूकंप, दुर्घटनाओं, व्यापारिक वस्तुओं तथा मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालेंगे।

शोधपरक चर्चा एवं विचार-विमर्श होगा

डॉ. जैन ने बताया कि जैन ज्योतिष केवल भविष्य कथन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रकृति, पर्यावरण, ग्रह-नक्षत्रों तथा मानव जीवन से जुड़े अनेक विषयों का गहन अध्ययन मिलता है। अधिवेशन में इन विषयों पर विद्वानों द्वारा शोधपरक चर्चा एवं विचार-विमर्श किया जाएगा।

इन शहरों के विद्वान होंगे शामिल

राष्ट्रीय अधिवेशन में जयपुर, उज्जैन, इंदौर, जबलपुर, नागपुर, दिल्ली, मेरठ, भोपाल, छिंदवाड़ा सहित देश के विभिन्न शहरों से अनेक प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य एवं विद्वान शामिल होंगे। दो दिवसीय आयोजन में जैन ज्योतिष की प्राचीन परंपरा, वर्तमान प्रासंगिकता और शोध की संभावनाओं पर मंथन किया जाएगा।