धामनोद। नगर के श्री 1008 पार्श्वनाथ जैन मंदिर में पूर्णिमा के पावन अवसर पर भोपाल से पधारे पंडित कमल जैन हाथीशाह के निर्देशन में श्री शांतिनाथ महामंडल विधान श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुआ।

पंडित कमल जैन, पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के परम शिष्य एवं आज्ञानुवर्ती हैं। उनके सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में समाजजनों ने विधान में सहभागिता की।

प्रातः से चलीं विधान की तैयारियां

प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में मंडल विधान की तैयारियां उत्साहपूर्वक शुरू हो गई थीं। कार्यक्रम संयोजक राकेश जैन ‘रिवाज’, समाज अध्यक्ष दीपक प्रधान, सचिव प्रभा प्रधान एवं मीडिया प्रभारी यश जैन ने बताया कि मंडल मांडने के साथ विधान आरंभ हुआ।

महिलाएं शुद्ध पीले रंग की साड़ी एवं पुरुष धोती-दुपट्टा पहनकर आराधना में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने नारियल एवं गोले अर्पित किए तथा अष्टद्रव्य से पूजा की।

कलश स्थापना और दीप प्रज्वलन की बोली

धामनोद में पहली बार मंडल मांडने पर बोली के माध्यम से कलश स्थापना की गई, जिसमें महिलाओं ने उत्साहपूर्वक बोली ली। शास्त्र विराजमान करने एवं दीप प्रज्वलन की भी बोली हुई।

दशलक्षण महापर्व के प्रारंभ में हुए ध्वजारोहण की ध्वजा का विसर्जन भी इस अवसर पर विधि-विधानपूर्वक संपन्न हुआ।

उपवास साधकों की तपस्या की अनुमोदना

विधान में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। सीमा मंडलोई, पूर्णिमा जैन एवं रश्मि जैन ने तीन उपवास की साधना की। प्रणीति जैन ने दस उपवास की तपस्या की। एक उपवास करने वाले अनेक साधक भी आयोजन में सम्मिलित हुए।

पंडित कमल जैन ने विधान की प्रत्येक क्रिया के भावार्थ समझाए, जिससे श्रद्धालुओं ने भक्ति के साथ ज्ञान का भी लाभ लिया।

व्यवस्थाओं में समाजजनों का सहयोग

व्यवस्थाओं में पंडित नितिन जैन, संजय भैया, संस्कार, निलेश जैन, पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र जैन, महेश जैन, संरक्षक नरेंद्र जैन अनाज वाले, संतोष जैन नवकार, शिखरचंद जैन, सुनील जैन, अभिषेक जैन सहित समाजजनों का सहयोग रहा।

एक नजर में

- पूर्णिमा के अवसर पर शांतिनाथ महामंडल विधान हुआ।

- पंडित कमल जैन हाथीशाह के निर्देशन में पूजन संपन्न हुआ।

- अष्टद्रव्य पूजन, कलश स्थापना एवं दीप प्रज्वलन की क्रियाएं हुईं।

- दशलक्षण पर्व की ध्वजा का विधिपूर्वक विसर्जन किया गया।

- तपस्वियों की उपवास साधना की अनुमोदना की गई।

श्रीफल साथी : दीपक प्रधान, धामनोद