श्रीफल की विशेष श्रृंखला में आज मिलिए इंदौर के अमित कासलीवाल परिवार से
दशलक्षण महापर्व के दस दिन केवल मंदिर जाकर पूजा करने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि ये परिवार की पूरी जीवनशैली को अनुशासन, सात्विकता और धर्म-साधना से जोड़ देते हैं। इंदौर के अमित कासलीवाल परिवार में भी पर्व के दौरान घर की दिनचर्या पूरी तरह बदल जाती है। परिवार के बड़े सदस्यों से लेकर बच्चों तक सभी अपनी क्षमता के अनुसार नियम, व्रत, उपवास और पूजन में सहभागिता करते हैं।
श्रीफल समूह की संपादक रेखा संजय जैन से चर्चा में अमित कासलीवाल ने बताया कि दशलक्षण पर्व के दौरान उनके परिवार में सुबह सामूहिक पूजन किया जाता है। परिवार की महिलाएं दस दिनों तक एकासन का नियम रखती हैं। घर के सदस्य मंदिर जाकर जिनेंद्र भगवान का अभिषेक, पूजन और धर्म आराधना करते हैं।
घर का भोजन, बाहर की वस्तुओं से पूरी दूरी
अमित कासलीवाल ने बताया कि पर्व के दिनों में बच्चों के लिए भी बाहर का भोजन पूरी तरह बंद कर दिया जाता है। बिस्किट, पैकेटबंद सामग्री और बाजार से आने वाली अन्य खाद्य वस्तुओं का उपयोग नहीं होता। परिवार के सभी सदस्य केवल घर में बना शुद्ध और सात्विक भोजन ही ग्रहण करते हैं।
उन्होंने कहा कि रात में भोजन न करने का नियम उनके परिवार में केवल पर्व के दस दिनों तक सीमित नहीं है। परिवार में वर्षभर रात्रि भोजन का त्याग रहता है। दशलक्षण पर्व के दौरान इस नियम का पालन और अधिक सावधानी तथा जागरूकता के साथ किया जाता है।
इससे बच्चों को भी यह संस्कार मिलता है कि धर्म केवल बोलने या सुनने का विषय नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में अपनाने का अभ्यास है।
घर के मंदिर में आरती, फिर समाज के आयोजनों में सहभागिता
दशलक्षण पर्व के दौरान शाम को परिवार के सभी सदस्य घर के मंदिर में आरती करते हैं। इसके साथ ही शहर के विभिन्न जैन मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों में भी परिवार का कोई न कोई सदस्य अवश्य सम्मिलित होता है।
कांच मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम हो, समवशरण में विशेष आयोजन हो या किसी अन्य जिनालय में पूजन और प्रवचन—परिवार प्रयास करता है कि इन दस दिनों में अधिक से अधिक समय धर्म आराधना में व्यतीत हो।
परिवार का मानना है कि मंदिर जाना केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि बच्चों और नई पीढ़ी को समाज, संस्कार और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का माध्यम भी है।
धूप दशमी पर प्राचीन विरासत का प्रदर्शन
धूप दशमी के अवसर पर कासलीवाल परिवार से जुड़े मंदिर में विशेष सजावट की जाती है। मंदिर में सुरक्षित प्राचीन धार्मिक वस्तुओं, कलात्मक सामग्री और परंपरागत धरोहरों को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए प्रदर्शित किया जाता है।
मंदिर की आकर्षक साज-सज्जा के साथ पुरानी वस्तुओं की प्रदर्शनी नई पीढ़ी को जैन समाज के इतिहास और धार्मिक विरासत से परिचित कराती है। परिवार के सदस्य भी इस आयोजन में सेवा और व्यवस्था के कार्यों में सहयोग करते हैं।
अनंत चतुर्दशी पर परिवार में उपवास का विशेष उत्साह
अमित कासलीवाल ने बताया कि अनंत चतुर्दशी के दिन परिवार के लगभग सभी सदस्य उपवास करते हैं। छोटे बच्चों से लेकर बड़े सदस्यों तक, स्वास्थ्य और क्षमता के अनुसार उपवास तथा अन्य धार्मिक नियमों का पालन किया जाता है।
किसी सदस्य को चिकित्सकीय परेशानी होने पर नियमों में आवश्यक परिवर्तन किया जाता है, लेकिन सामान्यतः परिवार के अधिकांश सदस्य उपवास कर भगवान की आराधना करते हैं।
दशलक्षण पर्व में सामूहिक रूप से नियम करने से परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे से प्रेरणा मिलती है। बच्चों को भी जब घर के बड़े एकासन, उपवास, पूजन और आरती करते दिखाई देते हैं, तो वे सहज रूप से धर्म के संस्कारों से जुड़ते जाते हैं।
परिवार के लिए आत्मसंयम का दस दिवसीय उत्सव
कासलीवाल परिवार के लिए दशलक्षण पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मसंयम और पारिवारिक एकता का उत्सव है। इन दस दिनों में घर का वातावरण पूजा, जाप, आरती, सात्विक भोजन और धार्मिक चर्चाओं से भक्तिमय बना रहता है।
परिवार का यह प्रयास संदेश देता है कि व्यस्त जीवन के बीच भी यदि संकल्प लिया जाए, तो पूरा परिवार धर्म और संस्कारों से जुड़ सकता है। दशलक्षण के दस दिन केवल व्यक्ति की साधना नहीं, बल्कि परिवार में धार्मिक वातावरण निर्मित करने का श्रेष्ठ अवसर भी बन सकते हैं।
श्रृंखला का उद्देश्य
श्रीफल की इस विशेष “दस दिन–दस परिवार” श्रृंखला का उद्देश्य यह जानना है कि दशलक्षण पर्व के दिनों में जैन परिवारों की दिनचर्या में क्या बदलाव आता है, आम दिनों और इन दस दिनों में कितना अंतर होता है तथा इस पर्व का परिवार और जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।
कल मिलेंगे एक और परिवार से, जो बताएगा कि दशलक्षण पर्व उनके घर में किस तरह आत्मशुद्धि, संस्कार और अनुशासन का वातावरण बनाता है।




