भरूच। श्रीक्षेत्र समवशरण तीर्थ, भरूच में श्रीमद् अभिनव स्वस्तिश्री अरिहंतकीर्ति भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी जी के निर्देशन में दशलक्षण महापर्व श्रद्धा और धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर चार विधानों का समापन विश्वशांति महायज्ञ के साथ किया गया।

एक साथ संपन्न हुए चार विधान
श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन समवशरण तीर्थ में दस दिनों तक श्री दशलक्षण विधान, चौसठ ऋद्धि विधान, सहस्रनाम विधान एवं चारित्र शुद्धि विधान आयोजित हुए। आयोजकों के अनुसार समवशरण तीर्थ में पहली बार इन चारों विधानों का एक साथ आयोजन हुआ।
अनंत चतुर्दशी पर तीर्थक्षेत्र में श्रीजी को सुंदर छत्र के साथ मस्तक पर विराजमान कर तीन परिक्रमा कराई गई। इस विशेष शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से सहभागिता की।
वार्षिक प्रतिक्रमण और तपस्वी सम्मान
भरूच नगर स्थित श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भट्टारक अरिहंतकीर्ति महास्वामी जी के मुखारविंद से वार्षिक श्रावक प्रतिक्रमण आयोजित हुआ। वहीं श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व में पांच एवं दस उपवास की तपस्या करने वाले तपस्वियों का सम्मान-बहुमान किया गया।
भट्टारक पीठ की ओर से तपस्वियों को दक्षिण भारत की पारंपरिक सम्मान-शॉल, माला एवं दुपट्टा पहनाकर अभिनंदन किया गया।
चांदी के सिंहासन पर श्रीजी का नगर भ्रमण
विशाल रथयात्रा में श्री महावीर स्वामी की मनोहारी प्रतिमा को चांदी के सिंहासन पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। पूज्य भट्टारक महास्वामी जी भी रथ में विराजमान रहे। रथयात्रा के दौरान भक्ति, जयकारों और धार्मिक उल्लास का वातावरण रहा।
सच्ची क्षमावाणी का संदेश
भट्टारक अरिहंतकीर्ति महास्वामी जी ने कहा कि क्षमा केवल प्रियजनों से मांगने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। क्षमावाणी की वास्तविक सार्थकता तब है, जब व्यक्ति उस व्यक्ति से क्षमा मांगे जिससे महीनों या वर्षों से बोलचाल बंद हो, जिसे वह देखना भी पसंद नहीं करता।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से वर्षभर में कम से कम एक बुराई का त्याग करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि मन से कटुता छोड़कर किसी एक ऐसे व्यक्ति से भी क्षमा मांग ली जाए, तो दशलक्षण और क्षमावाणी पर्व का उद्देश्य पूर्ण हो सकता है।
आयोजन में सहयोग
दशलक्षण महापर्व के आयोजन में सकल जैन समाज, श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर, भरूच का सहयोग रहा।
श्रीफल साथी : दिलीप ए. शाह, भरूच



