डडूका, बांसवाड़ा। श्रद्धाभक्ति से मनाया मोक्ष कल्याणक दिगंबर जैन मंदिर डडूका में श्रावण शुक्ला सप्तमी यानी मुकुट सप्तमी के अवसर पर जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महापर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर के स्वर्णभद्र कूट से मोक्ष प्राप्त भगवान पार्श्वनाथ की आराधना के अवसर पर दिनभर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हुए।

अभिषेक और शांतिधारा के साथ हुआ शुभारं

प्रातः मूलनायक भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा शकुंतला राजेंद्र पिंडारमिया, नौगामा की ओर से की गई। मंदिरजी से विधान स्थल पर भगवान को विराजमान कराने का सौभाग्य पंकज केशवलाल शाह परिवार को प्राप्त हुआ। विधान स्थल पर अभिषेक एवं शांतिधारा प्रदीप सेठ ने की।

विभिन्न कलशों की हुई स्थापना

पार्श्वनाथ विधान के दौरान मुख्य मंगल कलश स्थापना का सौभाग्य अर्निका राजेंद्र कोठिया को मिला। इशान कलश रेखा धनपाल सेठ, आग्नेय कलश शारदा लक्ष्मीलाल शाह, नैऋत्य कलश कुसुम अजीत कोठिया तथा वायव्य कलश रीता राकेश शाह ने स्थापित किया। दीप प्रज्वलन अक्षत मुकेश शाह ने किया।

निर्वाण लाडू किया अर्पि

भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर निर्वाण लाडू अर्पित किया गया। निर्वाण लाडू अर्पित करने का सौभाग्य हिमांशु निवेश वस्तुपाल शाह परिवार को प्राप्त हुआ। निर्वाण लाडू की द्रव्य सामग्री वीरेंद्र सागरमल शाह परिवार की ओर से प्रदान की गई।

64 अर्घ्य चढ़ाकर की विश्व शांति की कामना

विधान के दौरान समाजजनों ने 64 अर्घ्य समर्पित कर सुवृष्टि एवं विश्व शांति की मंगल कामना की। अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, पार्श्वनाथ विधान और निर्वाण कांड भाषा पाठ सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से सहभागिता की।

समाजजनों ने बढ़ाया आयोजन का उत्साह

कार्यक्रम में समाज अध्यक्ष राजेश शाह, युवा समिति अध्यक्ष चिराग शाह, जैन युवा समिति, प्रभावना महिला मंडल एवं पाठशाला परिवार के सदस्य शामिल रहे। विधान में मंत्रोच्चार मनोज शाह और राजेंद्र कोठिया ने किया। कार्यक्रम की जानकारी प्रवक्ता राकेश शाह ने दी।

धर्म और विश्व मंगल की भावना

मोक्ष कल्याणक महापर्व के माध्यम से श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण कल्याणक का स्मरण करते हुए धर्माराधना की। 64 अर्घ्य के माध्यम से सुवृष्टि एवं विश्व शांति की कामना की गई। पूरे आयोजन में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा