धामनोद। श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी के अवसर पर जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण महोत्सव श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। दिगंबर जैन मंदिर में अलसुबह समाजजन एकत्रित हुए और भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक, शांतिधारा तथा निर्वाण कांड का वाचन किया गया। राजेश जैन के मुखारविंद से अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई तथा भगवान को निर्वाण लाडू अर्पित किया गया।
प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य
भगवान के प्रथम अभिषेक का सौभाग्य स्वर्ण कलश से पूर्णिमा नरेंद्र जैन परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं शांतिधारा का सौभाग्य बड़े रजत कलश से पारस महेंद्र जैन परिवार को मिला। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान पार्श्वनाथ की आराधना की।
24 घंटे अखंड दीपक प्रज्वलित
समाज अध्यक्ष दीपक प्रधान, पूर्व अध्यक्ष रमेशचंद जैन, सचिव प्रभा अशोक प्रधान, सहसचिव अजय जैन, उपाध्यक्ष संदीप मंडलोई, कोषाध्यक्ष विजय जैन झंडा, सहकोषाध्यक्ष विजय जैन एवं पूर्व अध्यक्ष महेश जैन के निर्देशन में 24 घंटे का अखंड दीपक प्रज्वलित किया गया। मंत्रोच्चार संरक्षक अशोक प्रधान ने करवाया।
मुकुट सप्तमी पर महिलाओं ने किया तप
मुकुट सप्तमी के अवसर पर समाज की महिलाओं ने निर्जरा व्रत भी रखा। महिलाओं द्वारा प्रासुक जल से शुद्ध लाडू बनाकर आरती सजाकर मंदिर में लाए गए। सामूहिक रूप से निर्वाण कांड का वाचन किया गया और भगवान पार्श्वनाथ के प्रति श्रद्धाभाव रखते हुए सम्मेद शिखरजी की स्वर्णभद्र कूट पर श्री प्रभु के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित करने की भावना की गई।
जयकारों से गूंजा मंदिर
निर्वाण लाडू अर्पण के समय मंदिर में अनुपम दृश्य दिखाई दिया। घंटियां बजाई गईं और भगवान पार्श्वनाथ के जय-जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। इस अवसर पर समाज की महिलाओं ने शांतिधारा में राशि का सहयोग भी किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं एवं इंद्र उपस्थित रहे।
बिखरोंन के प्राचीन मंदिर में भी आयोजन
धामनोद के समीप स्थित प्राचीन जैन मंदिर बिखरोंन में भी भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक श्रद्धापूर्वक मनाया गया। यहां मूलनायक श्री पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा लगभग 235 वर्ष पुरानी बताई गई है और मंदिर अतिशय क्षेत्र के रूप में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां भी अभिषेक, शांतिधारा एवं निर्वाण कांड का वाचन कर निर्वाण लाडू चढ़ाया गया।
कुंवारी बेटियों ने रखा उपवास
इस दिन कुंवारी बेटियां भी पूरा उपवास रखती हैं। इसके माध्यम से तप और संयम के जरिए इंद्रियों पर नियंत्रण, सादा जीवन और त्याग का पाठ सीखने की प्रेरणा मिलती है। कुंवारी अवस्था में किए जाने वाले इस उपवास से भविष्य में धर्म, धैर्य और अच्छे आचरण का संयोग बने, ऐसी भावना की जाती है। इस अवसर पर विशेष पूजा, सामायिक, स्वाध्याय और ध्यान भी किया गया।
धर्म और संयम का संदेश
भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक जैन समाज के लिए तप, संयम, त्याग और आत्मशुद्धि की प्रेरणा का पर्व है। श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भगवान के गुणों का स्मरण करते हुए अपने जीवन में संयम और सदाचार अपनाने का संकल्प लिया।
इस आयोजन की जानकारी मीडिया प्रभारी यश जैन एवं समाज अध्यक्ष दीपक प्रधान ने दी।



