अडिन्दा पारसनाथ। उदयपुर संभाग के ऐतिहासिक अतिशय क्षेत्र श्री अडिन्दा पारसनाथ की पावन धरा पर कन्याकुमारी से हिमालय पर्यंत पद विहार कर जिनधर्म की पताका फहराने वाली गुरु परंपरा गौरव, आगमिक प्रखर वक्ता एवं चर्या शिरोमणि गणिनी आर्यिका रत्न श्री सुभूषणमति माताजी ससंघ के 42वें अभिनंदनीय वर्षायोग 2026 का मंगल कलश स्थापना समारोह सातिशय धर्म प्रभावना के साथ संपन्न हुआ।
धार्मिक क्रियाओं में भक्तों ने लिया पुण्यार्जन
देशभर से पहुंचे गुरु भक्तों ने ध्वजारोहण, श्रीजी का पंचामृत अभिषेक, महाशांतिधारा, क्षेत्र पर विराजमान मां पद्मावती एवं क्षेत्रपाल का सम्मान, मंगल कलश स्थापना, परम पूज्य गणिनी गुरु मां का पाद प्रक्षालन, पूजन, पुष्पवृष्टि एवं महाआरती सहित विभिन्न मांगलिक क्रियाओं में बढ़-चढ़कर सहभागिता की।
मंगल कलश स्थापना का उद्देश्य बताया
पुण्य अवसर पर मंगल आशीष प्रदान करते हुए गणिनी आर्यिका श्री सुभूषणमति माताजी ने कहा कि आगम में आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी को रात्रि के प्रथम प्रहर में वर्षायोग प्रतिष्ठापना का प्रकरण है, तो फिर मंगल कलश स्थापना क्यों?
उन्होंने कहा कि श्रावक पप से भयभीत और अहिंसा के प्रति सजग होता है। वह चाहता है कि नगर में विराजमान साधु का चातुर्मास निर्विघ्न एवं धर्म प्रभावना पूर्वक संपन्न हो तथा समाज में परस्पर किसी प्रकार की कलह न हो। इसी भावना से मंगल कलश स्थापना की जाती है।
वर्षायोग प्रकृति, चातुर्मास प्रवृत्ति का संकेत
गुरु मां ने कहा कि “वर्षायोग” शब्द प्रकृति की ओर संकेत करता है, जबकि “चातुर्मास” व्यक्ति की प्रवृत्ति को बताता है। वास्तव में जिसमें चतुराईपूर्वक मास व्यतीत हो जाए, वही चातुर्मास है।
वर्षाकाल में उत्पन्न होने वाले जीवों की विराधना से बचने के लिए साधु विहार को विराम देकर आत्मसाधना में रत रहते हैं। चार माह के चातुर्मास में चारों पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—में संतुलन बनाकर जीना ही वास्तविक चतुराई है।
धर्म के साथ अर्थ और जीवन का संतुलन
आर्यिका माताजी ने कहा कि अर्थ पुरुषार्थ में व्यक्ति इतना आसक्त न हो जाए कि धर्म को ही भूल जाए। धर्म पुरुषार्थ पूर्वक चार माह व्यतीत करना और चारों अनुयोगों को जानना ही चातुर्मास की सार्थकता है।
उन्होंने कहा कि जिस अर्थ के संग्रह में व्यक्ति खोया हुआ है, उसे यह समझना चाहिए कि धन से साधन मिलते हैं, सुख नहीं। सुख से कभी मोक्ष नहीं मिलता। भगवान आदिनाथ को भी धन-वैभव और गृहस्थ जीवन का त्याग कर जंगल की ओर जाना पड़ा।
अतिशय क्षेत्र पर वर्षायोग का विशेष महत्व
गुरु मां ने कहा कि भगवान अडिन्दा पार्श्वनाथ की पावन उपस्थिति वाले सिद्ध एवं अतिशय क्षेत्र पर वर्षायोग का अपना विशिष्ट महत्व है। यहां साधु आत्मसाधना में रत रहते हुए निरंतर भक्तों को मोक्षमार्ग से परिचित कराते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि गुरु के सान्निध्य में धर्म-ध्यान की लूट है, जिसे जितना संभव हो उतना प्राप्त कर लेना चाहिए।
मुख्य एवं रजत मंगल कलश का सौभाग्य
मंगल कलश स्थापना में श्रीमान जमुनालाल जी हापावत, राष्ट्रीय अध्यक्ष ग्लोबल महासभा, श्री जयकुमार कारवां, समवशरण उदयपुर, श्री सुरेश हिंसावत, अध्यक्ष अडिन्दा ट्रस्ट तथा श्री दिनेश दोषी, इडर परिवार को मुख्य एवं रजत मंगल कलश स्थापित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
पायडा मंदिर ने वर्षायोग के लिए किया निवेदन
इस पुण्य अवसर पर श्री पद्मप्रभुजी दिगंबर जैन मंदिर पायडा, गणेश नगर उदयपुर की पंच कमेटी के कार्यकर्ताओं एवं समस्त श्रावक-श्राविकाओं ने परम पूज्य गणिनी श्री सुभूषणमति माताजी के श्रीचरणों में श्रीफल अर्पित कर वर्षायोग 2027 पायडा में करने हेतु सविनय निवेदन किया।
मंगल कलश बना भावना प्रकट करने का निमित्त
आयोजन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु मां के सान्निध्य में धर्मलाभ एवं मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। मंगल कलश स्थापना का आयोजन भक्तों के लिए अपनी श्रद्धा और भावना प्रकट करने का निमित्त बना। जयकारों से दसों दिशाएं गुंजायमान हो उठीं।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गुरु मां के चरणों में बारंबार वंदन करते हुए शीघ्र प्रत्यक्ष दर्शन एवं मंगल आशीर्वाद प्राप्त करने की भावना व्यक्त की।



