अहमदाबाद, 24 अगस्त। मुनि श्री 108 प्रणुत सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में माता-पिता सम्मान एवं वात्सल्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम माता-पिता के त्याग, प्रेम, वात्सल्य और उपकारों को नमन करने का भावपूर्ण अवसर बना।
मां की ममता और पिता का त्याग
कार्यक्रम में कहा गया कि मां की ममता और पिता के त्याग को शब्दों में बांध पाना संभव नहीं है। मां ने जन्म से पहले ही संतान के सुख की चिंता की और अपनी नींद, इच्छाओं एवं सुखों का त्याग कर बच्चों को मुस्कुराना सिखाया। वहीं पिता ने स्वयं कठिनाइयां सहकर बच्चों के सपनों को पूरा करने का प्रयास किया।
मुनिश्री ने दिए संस्कार
मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज के सान्निध्य में मिले संस्कारों और प्रेरणादायी संदेशों ने उपस्थित जनों को माता-पिता के प्रति कृतज्ञता का भाव जागृत करने की प्रेरणा दी। माता-पिता को जीवन की ऐसी अमूल्य धरोहर बताया गया, जिनका ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता।
भावनाओं से सराबोर हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम के दौरान मंच पर व्यक्त हर भाव, शब्द और मुस्कान माता-पिता के प्रति सम्मान की कहानी कहती नजर आई। कहीं आंखों में भावुकता थी तो कहीं माता-पिता के प्रति कृतज्ञता और सम्मान की चमक दिखाई दी।
तस्वीरों में संजोई गईं स्मृतियां
कार्यक्रम की भावपूर्ण स्मृतियों को तस्वीरों में संजोया गया। आयोजन ने उपस्थित लोगों को यह संदेश दिया कि माता-पिता को केवल किसी विशेष अवसर पर नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक दिन सम्मान, समय और प्रेम देना चाहिए।
आशीर्वाद से आसान होती है जीवन की राह
कार्यक्रम में यह भाव व्यक्त किया गया कि माता-पिता का आशीर्वाद जीवन की कठिन राहों को सरल बनाने वाली शक्ति है। मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य को नमन करते हुए माता-पिता के चरणों में कृतज्ञता एवं श्रद्धा अर्पित की गई।



