आगरा। टीचर्स कॉलोनी, जयपुर हाउस स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्यश्री सौभाग्यसागरजी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की श्रद्धापूर्वक आराधना की गई। दिनभर के धार्मिक अनुष्ठानों के उपरांत मंदिर हॉल में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ।
‘एक अनसुनी पुकार’ का भावपूर्ण मंचन
स्वास्तिक महिला मंडल के तत्वावधान में प्रस्तुत नाटक ‘एक अनसुनी पुकार—हर आत्मा अनमोल है’ ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ एकता जैन, भावना जैन एवं सुनीता जैन के मंगलाचरण से हुआ।
निर्देशक पंकज जैन एवं पूजा जैन के निर्देशन में कलाकारों ने त्याग, सेवा, संवेदनशीलता और मानवता का प्रभावशाली संदेश दिया। नाटक में बताया गया कि प्रत्येक आत्मा अनमोल है तथा बेटी परिवार और समाज की महत्वपूर्ण कड़ी है, जो प्रेम, संस्कार, स्नेह और त्याग से दो परिवारों को जोड़ती है।
बेटियों के सम्मान और सेवा का संदेश
नाटक के माध्यम से बेटियों के सम्मान, जरूरतमंदों की सहायता तथा स्वार्थ का त्याग कर सेवा एवं परोपकार की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी गई। प्रभावशाली संवादों और अभिनय ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।
नाटक में नितिका रांवका, कुमारी सियोना, कुमारी दिव्याना, कुमारी ग्रेसी, कुमारी अनुरा एवं कुमारी आरवी ने सहयोगी कलाकार के रूप में भूमिका निभाई। उपस्थित समाजजनों ने सभी कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
त्याग का वास्तविक स्वरूप
कार्यक्रम में बताया गया कि उत्तम त्याग धर्म केवल धन अथवा वस्तुओं के त्याग तक सीमित नहीं है। लोभ, अहंकार, स्वार्थ और आसक्ति को छोड़ना भी त्याग का महत्वपूर्ण स्वरूप है। अपनी क्षमता के अनुसार दूसरों की सहायता करना और सेवा की भावना को जीवन में उतारना ही त्याग धर्म की वास्तविक सार्थकता है।




