आगरा। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, टीचर्स कॉलोनी, जयपुर हाउस में आचार्य श्री सौभाग्य सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में चल रहे दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को उत्तम आर्जव धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ आराधना की गई। दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ शास्त्र स्वाध्याय और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।

ध्यान और योग साधना से हुई दिन की शुरुआत

प्रातःकाल ध्यान एवं योग साधना शिविर के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। इसके बाद श्रीजी का अभिषेक एवं मंगल शांतिधारा की गई।

श्रद्धालुओं ने विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ अष्टद्रव्यों से उत्तम आर्जव धर्म की विशेष पूजा-अर्चना की। भगवान के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।

‘मन-वचन-कर्म में एकरूपता ही आर्जव’

इस अवसर पर तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन हुआ। धर्मसभा में आचार्य श्री सौभाग्य सागर जी महाराज ने उत्तम आर्जव धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि मन, वचन और कर्म में एकरूपता रखते हुए छल-कपट से दूर रहना तथा सरल एवं निष्कपट जीवन जीना ही आर्जव धर्म का संदेश है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आराधना की सार्थकता तभी है, जब व्यक्ति अपने विचार, वाणी और व्यवहार में भी सरलता तथा निष्कपटता को स्थान दे।

संत भवन में हुआ शास्त्र स्वाध्याय

दोपहर में संत भवन में शास्त्र स्वाध्याय का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने जैन दर्शन एवं दशलक्षण धर्म के आध्यात्मिक स्वरूप को समझते हुए स्वाध्याय का लाभ लिया।

मंगल आरती के बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

सायंकाल श्रीजी की मंगल आरती की गई। इसके बाद धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

इस अवसर पर शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति जयपुर हाउस, शांतिनाथ महिला मंडल एवं स्वास्तिक महिला मंडल के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।