मुरैना। संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर महाराज एवं आचार्यश्री अभिनंदन सागरजी महाराज के परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ससंघ का वर्षायोग मुरैना में प्रारंभ हुआ। वर्षायोग के दौरान साधु-संत एक स्थान पर स्थिर रहकर अहिंसा, संयम, स्वाध्याय, ध्यान, तप एवं जिनवाणी की आराधना करते हैं।
कलश स्थापना में उमड़ी श्रद्धा
आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज, मुनिश्री उपशांत सागरजी महाराज, ऐलकश्री उत्साह सागर, क्षुल्लकश्री उपकारसागर, क्षुल्लिकाश्री उदितमति एवं उपासनामति माताजी के पावन सान्निध्य में विधि-विधानपूर्वक मंगल कलश स्थापित किए गए। श्रद्धालुओं ने वर्षायोग के दौरान देवदर्शन, पूजन, स्वाध्याय, सामायिक, प्रतिक्रमण, तप एवं धर्मचर्चा करने का संकल्प लिया।
चातुर्मास आत्मचिंतन और आत्मकल्याण का अवसर
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि चातुर्मास केवल साधु-संतों के एक स्थान पर रहने का समय नहीं, बल्कि श्रावक-श्राविकाओं के लिए आत्मचिंतन और धर्माराधना का अवसर है। अहिंसा, संयम, त्याग और सदाचार को जीवन में अपनाते हुए राग-द्वेष एवं कषायों को कम करना ही वास्तविक धर्मसाधना है।
मुनिश्री उपशांत सागरजी ने कहा कि चातुर्मास चार माह का पड़ाव मात्र नहीं, बल्कि आत्मकल्याण की साधना का पवित्र अवसर है। कलश स्थापना तभी सार्थक होगी, जब हमारे भीतर भी धर्म, संयम, त्याग और सद्भावना का कलश स्थापित हो।
वर्षायोग में होंगे धार्मिक आयोजन
वर्षायोग के दौरान आचार्यश्री ससंघ के सान्निध्य में नियमित धर्मसभा, जिनवाणी प्रवचन, स्वाध्याय, तप, साधना एवं विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। मुनिश्री ने श्रद्धालुओं से नियमित मंदिर दर्शन, स्वाध्याय, सामायिक, पूजा-पाठ एवं साधु-संतों की वाणी का श्रवण कर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का आह्वान किया।
कलश स्थापना का मिला पुण्यार्जन
वर्षायोग कलश स्थापना समारोह में प्रथम कलश विनोदकुमार पवन कुमार जैन, उज्जैन, द्वितीय कलश रमाशंकर शुभम जैन नायक गढ़ी वाले, मुरैना, तृतीय कलश पवन कुमार सिद्धार्थ जैन पोरसा वाले, मुरैना, चतुर्थ कलश आशीषकुमार मिथुन जैन गढ़ी वाले, गंज मुरैना तथा पांचवां कलश विजयकुमार जैन, मुंबई के कर कमलों द्वारा स्थापित किया गया।
धार्मिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समारोह में बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी विशेष रूप से उपस्थित रहे। ब्रह्मचारी प्रदीप जैन ‘पियूष’ ने मंत्रोच्चारण के साथ धार्मिक क्रियाएं विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराईं। संजय शास्त्री सिहोनिया, विद्वान नवनीत शास्त्री एवं चक्रेश शास्त्री ने मंच संचालन में सहयोग प्रदान किया।
समारोह के शुभारंभ में प्रेमचंद पंकज जैन द्वारा ध्वजारोहण तथा अतिथियों द्वारा चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन किया गया। भूमि जैन, जैन मिलन की बालिकाओं एवं नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भक्तिमय नृत्य प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
विभिन्न नगरों से पहुंचे श्रद्धालु
समारोह में टीकमगढ़, फिरोजाबाद, सागर, दमोह, बड़ागांव, आठनेर, मुलताई, खड़गापुर, सुल्तानगंज, बांसा एवं अंबाह सहित विभिन्न स्थानों से गुरु भक्त साधर्मी बंधुओं ने सहभागिता की। जैन समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, महिला मंडल, युवा वर्ग एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।



