प्रतिष्ठाचार्य अजीत शास्त्री का हुआ देवलोकगमन : जैन विद्वत शास्त्री के निधन से समाज को अपूरणीय क्षति

जैन समाज के प्रकांड विद्वान अजीत शास्त्री ग्वालियर का विगत दिवस देवलोकगमन हो गया। वर्तमान में आप जैसवाल जैन धर्मशाला सोनागिर एवं श्री जिनेश्वर धाम तीर्थ क्षेत्र बरई के अध्यक्ष पद पर पदासीन थे। शास्त्री के असमय निधन से जैन समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर...
मुरैना। जैन समाज के प्रकांड विद्वान अजीत शास्त्री ग्वालियर का विगत दिवस देवलोकगमन हो गया। जैन समाज के ख्याति प्राप्त विद्वान, प्रतिष्ठाचार्य, विधानाचार्य, वास्तुविद, ज्योतिषाचार्य अजीत शास्त्री का जन्म मुरार (ग्वालियर) में जैसवाल जैन उपरोचिया समाज के रावत गोत्रीय श्रावक श्रेष्ठी स्व. मुंशीलाल जैन ‘कविवर’ (पाषण वाले) के यहां माता सोनावाई जैन की कोख से 4 जनवरी 1961 में हुआ था। आप बचपन से ही देव, शास्त्र, गुरु के प्रति समर्पित सेवा भावी स्वाध्याय प्रेमी थे। आपके निर्देशन में स्याद्वाद प्रेस सोनागिर से सैकड़ों जैन सहित्य की पुस्तकों का प्रकाशन हुआ। आपको प्राकृत, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत आदि भाषाओं का ज्ञान था। आपने अनेकों दिगंबराचार्यों के सान्निध्य में पंचकल्याणक, विधान एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाई। आपने अपनी योग्यता एवं काबिलियत के बलबूते पर जैन विद्वत जगत में एक अलग पहचान बनाई। वर्तमान में आप जैसवाल जैन धर्मशाला सोनागिर एवं श्री जिनेश्वर धाम तीर्थ क्षेत्र बरई के अध्यक्ष पद पर पदासीन थे। आपके निर्देशन में अतिशय क्षेत्र जिनेश्वर धाम तीर्थ बरई विकास की नई गाथा लिख रहा था। आप जैन दर्शन के साथ साथ ज्योतिष, वास्तुविद के अच्छे ज्ञाता थे। हाल ही में अचानक आपका स्वास्थ्य खराब हुआ और 15 जनवरी की मध्य रात्रि को आपका देवलोकगमन हो गया। आपके निधन का समाचार सुनते ही संपूर्ण विद्वत जगत एवं जैन समाज में शोक की लहर फैल गई। जैन समाज के मूर्धन्य विद्वान प्रतिष्ठाचार्य अजीत शास्त्री के असमय निधन से जैन समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। जिसकी निकट भविष्य में पूर्ति किया जाना संभव नहीं है।
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