इंदौर। मां अहिल्या की नगरी इंदौर इन दिनों संयम, तप, त्याग और साधना की त्रिवेणी बनी हुई है। मुनि पुंगव सुधासागर महाराज के दिव्य सानिध्य में चल रहे 33वें श्रावक संस्कार शिविर में देश के कोने-कोने से आए पांच हजार से अधिक श्रावक आत्मशुद्धि के मार्ग पर अग्रसर हैं। दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर यह शिविर श्रावकों के लिए ज्ञान और वैराग्य की पाठशाला बन गया है। प्रतिदिन मुनिश्री के उपदेशों के माध्यम से श्रावक ज्ञान रूपी सुधा का पान कर रहे हैं। मुनिश्री के प्रवचनों में उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव जैसे दस धर्मों की व्याख्या के साथ जीवन में संयम को उतारने की प्रेरणा दी जा रही है। हजारों की संख्या में श्रावक सुबह से शाम तक पूजा, भक्ति, आराधना और स्वाध्याय में लीन हैं। उनकी दिनचर्या पूरी तरह से संयमित और साधनामय है।

भोजन से लेकर अल्पाहार तक सेवा का महायज्ञ
दूसरी ओर श्रावकों के आहार और अल्पाहार की व्यवस्था में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन सहित सभी सामाजिक संगठन दिन-रात जुटे हुए हैं। यह सेवा का ऐसा महायज्ञ है, जो विगत सात दिनों से अनवरत जारी है। दलाल बाग स्थित विशाल पंडाल में शाम 4 बजे के बाद होने वाले अल्पाहार का दृश्य देखते ही बनता है। मंगलवार को भी हजारों की संख्या में श्रावक शाम 4 बजे से ही अल्पाहार के लिए पंडाल में पहुंचने लगे थे। यहां फेडरेशन की ओर से श्रावकों के व्रत-उपवास के अनुसार विशेष अल्पाहार प्रदान किया जा रहा है। किसी ने उपवास किया है तो किसी ने एकासना, सभी की आवश्यकता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
युवा और बुजुर्ग दोनों ही ले रहे बढ़-चढ़कर भाग
इस सेवा कार्य में युवा और बुजुर्ग दोनों ही बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। फेडरेशन के प्रदीप चौधरी, सुशील पांड्या, मनोहर झांझरी, डीके जैन, नमिष जैन, गिरीश जैन, संजय पापड़ीवाल, पिंकेश बिलाला सहित ढाई सौ स्वयंसेवक पूरी निष्ठा से सेवा दे रहे हैं। इतना ही नहीं, श्रावकों को आहार के लिए समाजजन अपने घर पर ससम्मान ले जाकर आहार करवा रहे हैं, जिसके लिए चातुर्मास आयोजन समिति की ओर से विशेष बसों की व्यवस्था की गई है।
श्रावकों ने कहा - परम सौभाग्य
इस अवसर पर श्रावकों ने फेडरेशन की व्यवस्था की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि मुनिश्री सुधासागर महाराज के सानिध्य में मिल रहा यह ज्ञान परम पुण्यशाली है और ऐसी व्यवस्थित सेवा से साधना और भी सरल हो जाती है। वहीं फेडरेशन के मनोहर झांझरी, सुशील पांड्या, राकेश विनायका और संजय पापड़ीवाल ने कहा कि हजारों त्यागी-व्रती श्रावकों की सेवा करना हमारे लिए परम सौभाग्य का विषय है। यही सच्चा धर्म है।




