अयोध्या। तीर्थंकर भगवंतों की कल्याणक भूमि एवं विशेष रूप से जन्मभूमि के विकास की ओर गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की विशेष आंतरिक रुचि सदा से रही है। गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी का कहना है कि हमारी संस्कृति का परिचय प्रदान करने वाली ये कल्याणक भूमि हमारी संस्कृति की महान धरोहर है। अतः इनका संरक्षण-संवर्धन-विकास अत्यंत आवश्यक है। पश्चिमी देशों (जैसे अमेरिका और यूरोप) के लोग जैन संतों की कठोर तपस्या, चौका विधि, आहार चर्या और अहिंसा के सिद्धांत से बहुत प्रभावित होते हैं और प्रवचन सुनने आते हैं। यूएसए से पूर्वा लठ्ठे जैन अपनी ढाई वर्ष की बेटी वीरा अभिषेक जैन को लेकर भारत की जैन जीवनशैली दिखाने और संतो के दर्शन के लिए अयोध्या पधारी हैं। उनके साथ उनके पिताजी हेमंत लठ्ठे जी(बेळगांवी) आए हैं जो दक्षिण भारत जैन सभा के पूर्व अध्यक्ष दिवाण बहादुर अण्णासाहेब लठ्ठे के पोते हैं।
पूरे परिवार ने लिया माताजी का आशीर्वाद
दिवाण साहब ने बॉम्बे प्रेसिडेंसी और कोल्हापुर संस्थान में दीवान के रूप में सेवा दी। उन्होंने जैन समाज में शिक्षा के प्रसार के लिए कई बोर्डिंग स्कूल और शिक्षण संस्थानों की नींव रखी। कमल पाटील (पुणे ), सुचेता हेमंत लठ्ठे (बेळगांवी), पूर्वा लठ्ठे जैन, वीरा अभिषेक जैन ये चार पीढ़ियों ने एकसाथ मिलकर अयोध्या पहुंचकर गणनी प्रमुख साध्वी ज्ञानमती माताजी ससंघ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
माताजी ने छोटी भक्त को दिया उपहार में शास्त्र
अयोध्या में आदिनाथ भगवान जी का पूजन, अभिषेक, शांतिधारा, आरती, क्षेत्र दर्शन करने का सौभाग्य पूरे परिवार को मिला। गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के दर्शन के लिए यूएसए से अयोध्या पधारी सबसे छोटी भक्त वीरा जैन को माताजी ने उपहार और अध्ययन के लिए शास्त्र भंेट स्वरूप दिया।




