इंदौर। जहाँ श्रद्धा से शीश झुकता है, वही धाम बनता है और भक्तों के त्याग से ही भगवान का नाम ऊँचा बनता है। इन्हीं भावपूर्ण संदेशों के साथ आचार्य श्री सुनीलसागर जी के पावन सानिध्य में अतिशय क्षेत्र पार्श्वनाथ धाम के शिलान्यास का ऐतिहासिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर गुरुदेव ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि यह केवल किसी भवन या मंदिर का शिलान्यास नहीं, बल्कि एक नए युग का पावन आह्वान है। प्रभु पारसनाथ के चरणों में किया गया सच्चा समर्पण और दान, आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था और संस्कारों की मजबूत नींव बनेगा। गुरुदेव ने कहा कि ईंट और पत्थर केवल निमित्त हैं, वास्तविक नींव तो विश्वास, श्रद्धा और समर्पण की होती है। जब दानदाताओं के हाथ उदारता से खुलते हैं, तभी इतिहास का निर्माण होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं की भावना की सराहना करते हुए कहा कि संसार में अनेक लोग ऐसे मिलेंगे, जिनकी क्षमता करोड़ों खर्च करने की होती है, किंतु वे लाखों में भी हिसाब करने लगते हैं। वहीं इस पावन भूमि का सौभाग्य है कि यहाँ हजार की क्षमता रखने वाला श्रद्धालु भी पाँच हजार की हिम्मत और उदारता दिखा रहा है।
समारोह श्रद्धा, समर्पण, त्याग और विश्वास का अनुपम संगम बना
गुरुदेव ने प्रेरक शब्दों में कहा कि बड़े मन वालों के सहयोग और समर्पण से ही बड़े मंदिरों का निर्माण होता है। उन्होंने त्याग और दान की महत्ता को प्रकृति के सुंदर उदाहरण से समझाते हुए कहा कि जब वसंत ऋतु ने वृक्षों से माँगा, तो उन्होंने अपने पत्ते तक दे दिए, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हीं वृक्षों पर नए और असंख्य पत्ते पुनः आ गए। इसी प्रकार सच्चे मन से किया गया त्याग और दान कभी व्यर्थ नहीं जाता, बल्कि अनेक गुना होकर जीवन में पुनः लौटता है। पार्श्वनाथ धाम का यह शिलान्यास समारोह श्रद्धा, समर्पण, त्याग और विश्वास का अनुपम संगम बना। उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रभु पारसनाथ के जयकारों के बीच इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनकर धर्म कार्य में अपना सहयोग और सहभागिता व्यक्त की।
आस्था का भव्य इतिहास रचा जाएगा
निश्चय ही पार्श्वनाथ धाम का यह शिलान्यास केवल निर्माण की शुरुआत नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास की उस मजबूत नींव का प्रतीक है, जिस पर आने वाले समय में धर्म, संस्कृति और आस्था का भव्य इतिहास रचा जाएगा।




