जयपुर। जनकपुरी जैन मंदिर में आचार्य श्री आदित्य सागर जी महाराज के सानिध्य में प्रतिदिन शाम को छहढाला का वाचन एवं आध्यात्मिक विवेचन चल रहा है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित होकर छहढाला के माध्यम से आत्मकल्याण एवं मोक्षमार्ग के गूढ़ सिद्धांतों को समझ रहे हैं। श्रेष्ठी पदम जैन बिलाला के अनुसार आचार्य श्री द्वारा छहढाला की दो ढालों का वाचन पूर्ण कराया जा चुका है तथा वर्तमान में तीसरी ढाल का वाचन चल रहा है। आज आचार्य श्री ने तीसरी ढाल के प्रथम पद का भावपूर्ण विवेचन करते हुए उसके आध्यात्मिक मर्म को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि छहढाला के प्रत्येक पद में आत्मा के स्वरूप, संसार की वास्तविकता तथा सम्यक् दर्शन, ज्ञान और चारित्र के माध्यम से आत्मकल्याण का मार्ग बताया गया है।
आत्मजागरण का विशेष माध्यम बन रहा
आचार्य श्री ने प्रथम पद के माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन की प्रेरणा देते हुए धर्म को केवल सुनने तक सीमित न रखकर अपने जीवन में उतारने का संदेश दिया। वाचन के पश्चात श्रद्धालुओं द्वारा धर्म एवं अध्यात्म से संबंधित जिज्ञासाएं भी रखी गईं, जिनका आचार्य श्री ने सहज एवं सरल तरीके से समाधान किया। प्रतिदिन शाम को हो रहा छहढाला वाचन श्रद्धालुओं के लिए ज्ञान, चिंतन और आत्मजागरण का विशेष माध्यम बन रहा है। वाचन के बाद श्रद्धालुओ द्वारा गुरु की आरती की जाती है।




