इंदौर। आज सफलता की दौड़ में आगे बढ़ने की चाह तो हर व्यक्ति के मन में है, लेकिन सफलता के साथ संस्कार, नैतिकता और संयम बने रहें—यही जीवन की वास्तविक जीत है। अंकलीकर परंपरा के चतुर्थ पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 सुनीलसागरजी महामुनिराज ने रविवार 13 सितम्बर को अभय प्रशाल में आयोजित ब्रह्मी लिपि सत्कार समारोह में इसी जीवन-दृष्टि को सरल, प्रभावी और प्रेरक शब्दों में रखा।

आचार्यश्री ने कहा कि बड़ी सड़क देखकर दौड़ना जरूरी नहीं है। जीवन की मंजिल तक पहुंचने के लिए छोटी पगडंडियों जैसे सरल, संयमित और सही रास्तों का चयन भी पर्याप्त है। उन्होंने बाहरी दुनिया में अच्छा व्यक्ति खोजने के बजाय स्वयं के भीतर झांकने की प्रेरणा दी। उनका संदेश स्पष्ट था—जीवन अनिश्चित है, इसलिए हर क्षण को मोक्षमार्ग, सदाचार और आत्म-विकास की दिशा में लगाना चाहिए।

आचार्यश्री के जीवन-टिप्स
नफरत और ईर्ष्या जीवन को पीछे ले जाती हैं। इनसे कोई व्यक्ति वास्तव में आगे नहीं बढ़ सकता। प्रेम, सद्भाव और क्षमा से ही संबंध तथा व्यक्तित्व दोनों समृद्ध होते हैं।
सफलता संस्कारों के साथ ही सुंदर बनती है। धन, पद और उपलब्धि तब सार्थक हैं, जब उनमें नैतिकता, विनम्रता और मानवीयता जुड़ी हो।
संगति जीवन की दिशा तय करती है। सत्संगति व्यक्ति को गोपाल बनाती है, जबकि गलत संगति उसके व्यवहार और विचार दोनों को दूषित कर सकती है।
शराब, गुटखा और नशा नैतिकता के सबसे बड़े शत्रु हैं। खान-पान, आचार और विचार की शुद्धि से ही प्रभावी व्यक्तित्व का निर्माण होता है।
पहचान से मिला नाम क्षणिक होता है, काम से मिला नाम स्थायी रहता है। इसलिए नाम और फोटो की अपेक्षा कर्म को बड़ा बनाइए।
परिवार को प्राथमिकता दें। कपड़ों की मैचिंग शरीर को सुंदर बनाती है, लेकिन परिवार में विचारों और व्यवहार की मैचिंग पूरे घर को सुंदर बनाती है।
अपने शब्द, कर्म, विचार, चरित्र और आदतों पर नजर रखें। यही आत्म-निरीक्षण व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है।
व्यसन फैशन का नहीं, भगवान का होना चाहिए। क्रोध, छल, कपट और खोटी आदतों से दूर रहकर श्रद्धा, साधना और सद्गुणों को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
खुद से प्रतिस्पर्धा करें। दूसरों से तुलना करने की जगह प्रतिदिन स्वयं को बेहतर बनाने का संकल्प लें।
सेल्फ मैनेजमेंट और टाइम मैनेजमेंट जरूरी है। स्वयं को समय दें, अपनों को समय दें और तनाव में नहीं, प्रसन्नता व आत्मबल के साथ काम करें।

कार्यक्रम से पूर्व आर्यिका श्री सुदृढ़मति माताजी ने भी युवाओं और परिवारों को संदेश दिया कि प्रतिस्पर्धा किसी और से नहीं, स्वयं से होनी चाहिए। संस्कार केवल प्राप्त करने की वस्तु नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी आचार्यश्री का आशीर्वाद लेते हुए कहा कि सफलता का प्रारंभ घर के संस्कारों से होता है और दैनिक जीवन में पूजा, योग तथा अनुशासन को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
समाज को दिशा देने वाला आयोजन

सकल दिगम्बर जैन समाज, इंदौर; इंद्रपुरी चातुर्मास कमेटी एवं दिगम्बर जैन समाज, नेमीनगर, इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में यह आयोजन संपन्न हुआ। आयोजन को सफल बनाने में जैन सोशल ग्रुप इंदौर अहिल्या रीजन, जेएसजी लीजेंड एवं परिवार तथा आरोहण परिवार का विशेष सहयोग रहा।

मुख्य संयोजक संदीप–सुनीता जैन मोयरा सरिया परिवार ने सभी संस्थाओं को साथ लेकर जिस आत्मीयता, सुव्यवस्था और दूरदर्शी सोच के साथ आयोजन किया, वह प्रशंसनीय रहा। ऐसे आयोजन समाज में केवल भीड़ नहीं जुटाते, बल्कि विचारों का संस्कार पैदा करते हैं। आज जब युवा सफलता की ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं, तब उन्हें यह संदेश देना अत्यंत आवश्यक है कि सफलता का सही अर्थ केवल आगे निकलना नहीं, बल्कि मूल्यों के साथ आगे बढ़ना है।
आचार्यश्री की अमृतवाणी का सार यही है—जीवन में लक्ष्य बड़े रखें, लेकिन रास्ता सच्चाई, संयम, संस्कार और नैतिकता का चुनें।
मांगलिक क्रियाएं श्रद्धा से संपन्न
कार्यक्रम में सर्वप्रथम झंडा रोहण आर. के. रानेका, सुदर्शन गुप्ता, कैलाश वेद, संदीप जैन द्वारा किया गया । कार्यक्रम में चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन तुलसी सिलावट, नरेन्द्र वेद,नवीन–आनंद गोधा, हर्ष गोधा, संदीप जैन मोयरा सरिया, विनय बाकलीवाल, कैलाश वेद, अमित कासलीवाल, टी.के. वेद, इंदर सेठी, शेखर छाबड़ा एवं राजकुमार पाटोदी ने किया।

आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन
आचार्य श्री 108 सुनीलसागरजी महामुनिराज का विधि-विधानपूर्वक पाद प्रक्षालन संदीप सुनीता जैन,देव जैन मोयरा सरिया,सूरज साक्षी जैन ने किया।
शास्त्र भेंट और संचालन
शास्त्र भेंट सुनीता जैन, साधना दगड़े, श्रीफल समूह की संपादक रेखा संजय जैन, अनामिका बाकलीवाल एवं मेघना जैन ने की। कार्यक्रम का संचालन अनुराग जैन ने किया। अध्यक्षीय उद्बोधन मुख्य संयोजक संदीप जैन मोयरा सरिया ने दिया।

कार्यक्रम में कांतिलाल बम, श्रीमती पुष्पा कासलीवाल, मनोहर झांझरी, राजेंद्र सोनी, राजेश जैन, अनुराग वेद, आनंद कासलीवाल, जैनेश झांझरी, नकुल पाटोदी, पवन पाटोदी, पिंकी टोंग्या,सुरेंद्र बाकलीवाल,दिलीप पाटनी,दिलीप जैन,सुनील गोधा, डी.के.जैन,नमिष जैन, जितेंद्र पोरवाल एवं संजय बड़जात्या सहित अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी उपस्थित रहे।







