इंदौर। नेमी नगर जैन कॉलोनी में चल रहे चातुर्मास में घुंघट गार्डन का सन्मति समवशरण पांडाल धर्म प्रभावना का तीर्थ बना हुआ है। यहां देश के दूर-दूर प्रांतों और स्थानों से गुरुभक्त श्रद्धालु दर्शन और आशीष पाने के लिए आ रहे हैं। गुरुवार को सांगानेर संस्थान की छात्राओं ने आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी गुरुदेव के चरणों में पहुंचकर उनका सान्निध्य एवं मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर गुरुदेव ने जीवन में पुण्य के उदय, जिनशासन की प्राप्ति और तत्वज्ञान के महत्व को समझाते हुए प्रेरणादायी उद्बोधन दिया। गुरुदेव ने कहा कि कुछ तो पुण्य अर्जित किए होंगे, तभी तो आज इतने ऊँचे आसन पर विराजमान होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। जीव की अनंत यात्रा को देखें तो निगोद जैसी निम्न अवस्था से निकलकर सात राजू ऊपर तक की यात्रा करना और फिर मनुष्य जन्म प्राप्त होना अत्यंत दुर्लभ है। ऐसे में जिनशासन मिलना, धर्म की प्राप्ति होना और उससे भी बढ़कर तत्वज्ञान के मार्ग पर चलने का अवसर मिलना, यह सब पूर्व जन्मों के पुण्य का उदय है।

आत्मकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ें

उन्होंने कहा कि इस आध्यात्मिक ऊँचाई तक पहुँचना जितना कठिन है, उससे कहीं अधिक कठिन है उस ऊँचाई को बनाए रखना। थोड़ी-सी लापरवाही व्यक्ति को ऊँचाई से नीचे गिरा सकती है। इसलिए जीवन में सदैव सावधान रहना चाहिए और अपने आत्मकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। गुरुदेव ने आगे प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, उनसे संघर्ष करते हुए जो व्यक्ति अपने धैर्य और धारण शक्ति को बनाए रखता है, वही वास्तव में बड़ा बनता है। कठिनाइयों के सामने हार न मानकर अपने आदर्शों और सिद्धांतों पर अडिग रहना ही जीवन की सच्ची महानता है।