सनावद। पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के आठवें दिन आचार्य श्री शांतिसागर वर्धमान देशना संत निलय, बड़ा मंदिर में उत्तम त्याग धर्म की श्रद्धापूर्वक आराधना की गई। परम पूज्य पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्धसागरजी महाराज के संघस्थ बाल ब्रह्मचारी संजय भैया के पावन सान्निध्य में धर्मसभा आयोजित हुई।
प्रातःकाल जिनेंद्र देव का पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा एवं संगीतमय पूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
संग्रह दुख और त्याग मोक्ष का कारण
ब्रह्मचारी संजय भैया ने उत्तम त्याग धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि दान हमेशा स्व और पर के उपकार के लिए किया जाता है। त्याग धर्म सिखाता है कि जो वस्तु हमारे लिए आवश्यक नहीं है, उसका त्याग करना ही सच्चा सुख है।
उन्होंने कहा कि संग्रह दुख का कारण है और त्याग मोक्ष का कारण। सच्चा त्यागी वही है, जो किसी फल की इच्छा रखे बिना त्याग करता है। उत्तम त्याग धर्म के दिन जैन अनुयायी क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारी भावों के त्याग का संकल्प लेते हैं।
चार प्रकार के दान का महत्व
ब्रह्मचारी संजय भैया ने बताया कि दान चार प्रकार के होते हैं—
- आहार दान
- औषधि दान
- शास्त्र दान
- अभय दान
इस अवसर पर समाजजनों ने चारों प्रकार के दान में अपनी राशि समर्पित कर पुण्यार्जन किया। शाम को श्रीजी की आरती, भक्ति और प्रवचन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
प्रतिदिन हो रही ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताएं
पर्युषण पर्व में आचार्य वर्धमानसागर बहु मंडल, महिला महासमिति, आचार्य वर्धमानसागर युवा संघ एवं सुपार्श्वनाथ महिला मंडल द्वारा जैन धर्म पर आधारित ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इनमें समाजजन उत्साहपूर्वक सहभागिता कर रहे हैं।
पुण्यार्जक परिवार
पूर्ण सुगंधित जल कलश का सौभाग्य देशना-वैभव-प्रकाशचंद सराफ परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का सौभाग्य कर्णिका-प्रशांत-सुधीर चौधरी परिवार को मिला।




