सनावद, 25 सितंबर। पर्वाधिराज दशलक्षण पर्व के अंतिम पावन अवसर, भादौ शुक्ल चतुर्दशी अर्थात अनंत चतुर्दशी पर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना श्रद्धा एवं भक्तिभाव से की गई।
आचार्य श्री शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय, बड़ा मंदिर सनावद में पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के संघस्थ बाल ब्रह्मचारी संजय भैया जी के पावन सान्निध्य में धर्मसभा संपन्न हुई।
अभिषेक, शांतिधारा और निर्वाण लाडू
प्रातःकाल श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर एवं देशना संत निलय में जिनेंद्र देव का पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा एवं संगीतमय पूजन हुआ। भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू समर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
पूर्ण सुगंधित जल कलश करने का सौभाग्य अभियांशु, अभिजीत एवं अक्षय कुमार जैन परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का सौभाग्य पुलकित, कार्णिका, प्रशांत जैन परिवार; धर्मचंद, अंकित, सर्वज्ञ, विध्यांश परिवार तथा अक्षय, अभिजीत, अभियांशु सराफ परिवार को मिला।
आत्मा में रमण ही ब्रह्मचर्य
धर्मसभा को संबोधित करते हुए ब्रह्मचारी संजय भैया ने कहा कि ब्रह्म में लीन रहना ही ब्रह्मचर्य है। ब्रह्मचर्य का अर्थ अपनी आत्मा में रमण करना है। जब मन पर-पदार्थों से हटकर आत्मा में स्थिर हो जाता है, तब सच्चा ब्रह्मचर्य प्रकट होता है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मचर्य आत्मा का सच्चा आभूषण है, जिससे मन में पवित्रता और जीवन में संयम आता है। केवल स्पर्श इंद्रिय ही नहीं, बल्कि पांचों इंद्रियों के विषयों में निरोध का नाम भी ब्रह्मचर्य है।
नगर में निकला जुलूस
दोपहर में अनंत चतुर्दशी पर बड़ा मंदिर से जुलूस निकाला गया, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः बड़े मंदिर पहुंचकर संपन्न हुआ।
आदिनाथ जिनालय, सुपार्श्वनाथ जिनालय एवं पार्श्वनाथ मंदिर में विशेष अभिषेक किए गए। पार्श्वनाथ जिनालय में अभिषेक का सौभाग्य वीरेंद्र कुमार-प्रतीक जैन, राजू बुक्स परिवार एवं डॉ. राहुल-स्वास्तिक परिवार को प्राप्त हुआ।
संगीतमय आरती और सम्मान
रात्रि में संगीतमय आरती-भक्ति में प्रदीप पंचोलिया, हर्षिल केके, प्रांशुल पंचोलिया, कमल केके, सुदेश जटाले, संगीता पाटोदी, प्रशांत जैन, तरिशी जैन, सभ्यता जैन, सुरभि जैन, लक्ष्मी जैन, विरक्ति पाटनी एवं श्रुति सर्राफ की विशेष सहभागिता रही।
प्रवचन के पश्चात समाजजनों द्वारा ब्रह्मचारी संजय भैया जी का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
एक नजर में
- अनंत चतुर्दशी पर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना हुई।
- भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू समर्पित किया गया।
- ब्रह्मचारी संजय भैया ने आत्मा में रमण को सच्चा ब्रह्मचर्य बताया।
- बड़ा मंदिर से नगर में धार्मिक जुलूस निकाला गया।
- विभिन्न जिनालयों में विशेष अभिषेक एवं संगीतमय आरती हुई।
पोल : उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का कौन-सा संदेश जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है?
- इंद्रियों पर संयम और आत्मनियंत्रण
- आत्मा में स्थिरता और मन की पवित्रता
श्रीफल साथी : सन्मति जैन काका, सनावद





