धरियावद, 26 अगस्त। आचार्य कल्प 108 श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में बुधवार को क्षुल्लिका सुवर्ण मति माताजी के समाधि मरण के उपलक्ष्य में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा में आचार्य कल्प पुण्य सागर जी, मुनिराज उपदेश सागर जी, आर्यिका सौरभ मति माताजी, आर्यिका निर्णय मति माताजी, प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन, बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी तथा क्षुल्लिका माताजी के गृहस्थ जीवन के परिजनों ने विनयांजलि अर्पित की।

सभी ने सुवर्ण मति माताजी के व्यक्तित्व, तप, त्याग और संयममय जीवन का स्मरण करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

समाधि मरण पुण्यशाली जीवों को प्राप्त होता है

आचार्य कल्प पुण्य सागर जी महाराज ने कहा कि समाधि मरण पुण्यशाली जीवों को ही प्राप्त होता है। जिस आत्मा ने पूर्व भवों में पुण्य का संचय किया होता है, वही गृहस्थ जीवन के सभी दायित्वों को पूर्ण कर मोह-ममता का त्याग करते हुए संयम के मार्ग पर अग्रसर होती है और अंततः समाधिपूर्वक मरण को प्राप्त करती है।

चार वर्ष पूर्व सोनागिरि में ग्रहण की थी दीक्षा

आचार्यश्री ने कहा कि क्षुल्लिका सुवर्ण मति माताजी ने भी चार वर्ष पूर्व सोनागिरि सिद्ध क्षेत्र में दीक्षा ग्रहण कर संयम मार्ग अपनाया और अंत समय में समाधिपूर्वक देह का त्याग किया। उनका संपूर्ण जीवन सभी के लिए प्रेरणादायी है।

उन्होंने गृहस्थ अवस्था में भी संयम और संस्कारों के साथ जीवन जिया तथा अपने परिवार को धर्म एवं संस्कारों से जोड़ा।

माताजी के संस्कारों का परिणाम है धर्म प्रभावना

आचार्यश्री ने कहा कि माताजी की पुत्री बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी आज संघ की संचालिका के रूप में पूरे भारतवर्ष में धर्म प्रभावना कर रही हैं और संपूर्ण संघ की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

उन्होंने कहा कि यह माताजी के संस्कारों और पुण्य का ही परिणाम है कि उन्होंने ऐसी धर्मनिष्ठ और समर्पित पुत्री को जन्म दिया।

धर्म और संयममय जीवन की प्रेरणा

आचार्यश्री ने कहा कि माताजी के जीवन से प्रत्येक श्रावक-श्राविका को प्रेरणा लेनी चाहिए और भावना करनी चाहिए कि हमारा जीवन भी धर्म, संयम और संस्कारों से परिपूर्ण हो।

उन्होंने कहा कि जब जीवन का अंतिम समय आए तो देव-शास्त्र-गुरु की शरण प्राप्त हो, मुख से अरिहंत-सिद्ध भगवान का नाम स्मरण होता रहे और प्रयाण धर्ममय वातावरण में हो, ताकि मोक्षमार्ग प्रशस्त हो सके।

श्रद्धालुओं ने की उत्तम गति की मंगल भावना

सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने क्षुल्लिका सुवर्ण मति माताजी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके आत्मकल्याण एवं उत्तम गति की मंगल भावना की।

कार्यक्रम का संचालन प्रतिष्ठाचार्य भागचन्द जैन ने किया। यह जानकारी वर्षायोग कमिटी के अध्यक्ष सागर मल बोहरा ने दी।

भक्तामर विधान में 9 परिवारों ने किया पुण्यार्जन

आचार्य कल्प पुण्य सागर महाराज ससंघ का वर्ष 2026 का वर्षायोग धरियावद की महावीर वाटिका में चल रहा है। यहां 48 दिवसीय भक्तामर विधान का आयोजन किया जा रहा है।

विधान के 26वें दिन 9 पुण्यार्जक परिवारों ने पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ लिया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से सहभागिता करते हुए पुण्यार्जन किया।