सनावद। त्याग और संयम के पथ पर अग्रसर नगर की वयोवृद्ध प्रतिमाधारी मनोरमा जी जैन (मनु बहन जी) अब जैनेश्वरी दीक्षा की ओर अग्रसर हो रही हैं। उन्होंने दीक्षा के लिए आचार्यश्री के समक्ष श्रीफल समर्पित कर अपनी भावना व्यक्त की।

आचार्यश्री ने स्वीकार किया दीक्षा का निवेदन

सन्मति जैन काका ने बताया कि 81 वर्षीय श्रीमती मनोरमा बाई जैन ने सीकर, राजस्थान में विराजमान नगर गौरव वात्सल्य वारिधि आचार्य रत्न आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज को जैनेश्वरी दीक्षा हेतु श्रीफल समर्पित कर निवेदन किया।

आचार्यश्री ने सहज भाव से मनोरमा बाई के निवेदन को स्वीकार करते हुए उन्हें जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान करने की स्वीकृति प्रदान की।

19 अगस्त को सीकर में 7 जैनेश्वरी दीक्षाएं

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सान्निध्य में मुकुट सप्तमी के अवसर पर आगामी 19 अगस्त को सीकर, राजस्थान में मनोरमा जैन सहित 7 जैनेश्वरी दीक्षाएं प्रदान की जाएंगी। इस आयोजन को लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।

सनावद से आचार्यश्री का विशेष संबंध

आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज सनावद नगर के ही हैं। वर्तमान में जैन धर्म के उच्च पद पर विराजमान होकर वे धर्म प्रभावना कर रहे हैं। उनके जीवन एवं साधना से प्रेरणा लेकर अब तक सनावद नगर से लगभग 18 तपस्वियों ने मोक्षमार्ग की दिशा में कदम बढ़ाया है।

सनावद के लिए गौरव का अवसर

आचार्यश्री के सान्निध्य और प्रेरणा से नगर से अनेक तपस्वियों का त्याग एवं संयम के मार्ग पर अग्रसर होना सनावद के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है। मनोरमा बाई जैन के दीक्षा की ओर बढ़ते कदम से समाज में त्याग, संयम और आत्मकल्याण की भावना को और बल मिला है।

समाजजनों ने की अनुमोदना

इस पुण्य अवसर पर समस्त समाजजनों ने मनोरमा बाई जैन के त्यागमय निर्णय की अनुमोदना करते हुए उन्हें बधाई एवं मंगलकामनाएं प्रेषित की हैं। समाजजनों ने उनके आगामी दीक्षा जीवन के लिए मंगलकामना करते हुए आत्मकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की भावना व्यक्त की।