बड़ामलहरा। उदासीन आश्रम द्रोणगिरि जिला छतरपुर में आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के शिष्य शाश्वत सागर जी महाराज का चातुर्मास चल रहा है। महाराज श्री लगातार दो उपवास के बाद एक आहार लेते हैं वो भी बगैर अनाज के मात्र फल और साग, नमक और मीठा का भी त्याग है। पूरा आयुर्वेद का ज्ञान और योग तथा प्राणायाम जिनकी दिनचर्या में शामिल एवं पूर्ण समय स्वाध्याय और ध्यान कर अपनी आत्मा को कल्याण के मार्ग पर लगाए हुए , ऐसी कठिन साधना में लीन महाराज श्री की छठवें दिन पारणा निरंतराय संपन्न हुई। ऐसे मुनिवर को आहार कराकर पुण्य का संचय करने का सौभाग्य श्रावकों को प्राप्त हुआ। रंजना जैन बड़ामलहरा, रजनी जैन बड़ामलहरा, कल्पना जैन बड़ामलहरा, मनोज शास्त्री द्रोणगिरि, चंद्रकुमार जैन बड़ामलहरा, प्रीति जैन बड़ामलहरा, राजकुमार द्रोणगिरि जैन एवं आश्रम कमेटी व बाहर से पधारे हुए श्रावकों को अवसर प्राप्त हुआ।