पालीताणा, गुजरात। शत्रुंजय गिरिराज की सुरक्षा तथा वहां चल रहे कथित विकास एवं वृक्षारोपण कार्यों को लेकर इंटरनेशनल जैन फाउंडेशन (आईजेएफ) ने प्रश्न उठाए हैं। संगठन ने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं विशेषज्ञ समिति से जांच कराने की मांग की है।
भारी मशीनों के उपयोग पर सवाल
आईजेएफ की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया है कि वृक्षारोपण के लिए भारी मशीनों, जेसीबी, डंपर और बुलडोजर के उपयोग की आवश्यकता को लेकर सवाल सामने आए हैं। फाउंडेशन का मत है कि वृक्षारोपण के लिए सामान्यतः छोटे गड्ढे पर्याप्त होते हैं और यह कार्य बड़े स्तर पर श्रमदान से भी किया जा सकता है।
संगठन ने कहा कि गिरिराज जैसे धार्मिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र में किसी बड़े कार्य से पहले समाज तथा साधु-संतों की जानकारी और मार्गदर्शन लिया जाना चाहिए।
चित्रों और वीडियो की स्वतंत्र जांच की मांग
वक्तव्य के अनुसार, संगठन के संज्ञान में आए कुछ चित्रों एवं वीडियो में बड़े स्तर पर रास्तों की खुदाई और भूमि समतलीकरण दिखाई देने का दावा किया गया है। आईजेएफ ने कहा कि इन कार्यों की वास्तविक प्रकृति, आवश्यकता और उद्देश्य की स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है।
फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि ये सवाल संगठन की ओर से उठाए गए हैं और इनकी तथ्यात्मक स्थिति स्वतंत्र जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ड्रोन सर्वे व विशेषज्ञ समिति का प्रस्ताव
आईजेएफ ने शत्रुंजय गिरिराज के विभिन्न हिस्सों का ड्रोन सर्वे कराने की मांग की है। संगठन ने पर्यावरण, भूगोल, पुरातत्व और निर्माण क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक पेशेवर जांच समिति गठित करने का सुझाव दिया है।
वक्तव्य में श्री आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी की भूमिका एवं जिम्मेदारी के संबंध में भी जांच की मांग की गई है।
श्रमदान से संरक्षण का सुझाव
फाउंडेशन ने कहा कि यदि कार्य का उद्देश्य केवल वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण है, तो देशभर से जैन समाज के स्वयंसेवक श्रमदान के लिए आगे आ सकते हैं। संगठन ने विभिन्न तीर्थ क्षेत्रों में स्वच्छता एवं प्लास्टिक हटाने जैसे पूर्व अभियानों में स्वयंसेवकों की सहभागिता का उदाहरण दिया।
आईजेएफ ने कहा कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि गिरिराज की प्राकृतिक और धार्मिक विरासत की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा चल रहे कार्यों से संबंधित तथ्य सामने लाना है।
श्रीफल साथी : राजीव सिंघई





