नौगामा (जिला बांसवाड़ा)। दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन 25 सितंबर को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के अवसर पर नौगामा में धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आयोजित किए गए।

प्रातःकाल 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसियाजी एवं आदिनाथ मंदिर में मुख्य वेदी सहित 52 वेदियों पर विराजमान प्रतिमाओं का श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से अभिषेक किया।

गाजे-बाजे के साथ पंडाल पहुंचे श्रीजी

अभिषेक के पश्चात श्रीजी को गाजे-बाजे, भक्ति संगीत एवं चंवर ढुलाते हुए पंडाल परिसर में लाकर सिंहासन पर विराजमान किया गया। पंचोली राजा बाबू रमलाल को प्रथम अभिषेक का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

राजेंद्र जैन, अभिषेक भैया, वीना दीदी, रमेशचंद्र गांधी एवं दृष्टि दीदी के सान्निध्य में दशलक्षण पूजन, पंचमेरु पूजन तथा आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की पूजा-अर्चना संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों, नृत्य एवं जयघोष के साथ अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

वासुपूज्य भगवान को अर्पित किया निर्वाण लाडू

भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर निर्वाण लाडू अर्पित किया गया। प्रथम निर्वाण लाडू अर्पित करने का सौभाग्य गांधी पंकज, गांधी विपुल एवं गांधी विजेंद्र को प्राप्त हुआ।

550 विद्यार्थियों ने गाया वंदे मातरम्

पंडाल परिसर में राष्ट्रभक्ति का विशेष वातावरण उस समय बना, जब राजकीय बालिका एवं सीनियर माध्यमिक विद्यालय के लगभग 550 छात्र-छात्राओं, विद्यालय स्टाफ एवं प्रधानाचार्य ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गान किया।

जैन समाज की ओर से सभी विद्यार्थियों, विद्यालय स्टाफ एवं प्रधानाचार्य को कार्यक्रम में सहभागिता के लिए शुभकामनाएं एवं बधाई दी गई।

महाआरती और ‘देवी अहिल्या’ नाटिका

सायंकाल आचार्य भक्ति एवं प्रतिक्रमण के पश्चात आदिनाथ मंदिर में तीन थाल सजाकर भव्य महाआरती की गई। भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक महाआरती में सहभागिता की।

इसके बाद भैया जी ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के महत्व पर प्रेरणादायी प्रवचन देते हुए इसे आत्मसंयम, सदाचार एवं आत्मशुद्धि का मार्ग बताया। जैन पाठशाला के बच्चों ने ‘देवी अहिल्या’ नाटिका का मंचन कर धार्मिक एवं नैतिक संदेश दिया।

कार्यक्रम के अंत में जैन समाज अध्यक्ष विपुल पंचोली ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं, विद्यार्थियों, विद्यालय स्टाफ एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। मुकुट सप्तमी के उपवास करने वाले छात्रों को पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया।

एक नजर में

मुख्य वेदी एवं 52 वेदियों पर विराजमान प्रतिमाओं का अभिषेक हुआ।

श्रीजी को भक्तिभाव से पंडाल में सिंहासन पर विराजमान किया गया।

वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू अर्पित हुआ।

लगभग 550 विद्यार्थियों ने वंदे मातरम् का सामूहिक गान किया।

महाआरती, प्रवचन एवं ‘देवी अहिल्या’ नाटिका का आयोजन हुआ।

श्रीफल साथी : सुरेश चंद्र गांधी, नौगामा, जिला बांसवाड़ा