धरियावद। श्री दिगंबर जैनाचार्य विद्यासागर यात्रा संघ उदयपुर-मेवाड़ के 54 सदस्यीय दल ने दक्षिण भारत के कर्नाटक स्थित जैन काशी मूडबद्री में 18 ऐतिहासिक प्राचीन मंदिरों के दर्शन-वंदन किए। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से जिनेंद्र भगवान की आराधना कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

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भट्टारक महास्वामी से प्राप्त की ऐतिहासिक जानकारी

यात्रा संघ के सदस्यों ने मूडबद्री पीठ के भट्टारक महास्वामी से क्षेत्र की ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त कर उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने मूडबद्री पीठ में संरक्षित धवला, जयधवला, समयसार आदि प्राचीन ग्रंथों की ताड़पत्र एवं ताम्रपत्र पर लिखी प्रतियों का अवलोकन कराया।

भट्टारक महास्वामी ने वहां संरक्षित सैकड़ों वर्ष प्राचीन जैन प्रतिमाओं के दर्शन भी कराए। उनके अनुसार संग्रह में रत्न, स्फटिक मणि, चंदन, पाषाण, धातु और हीरा जड़ित प्रतिमाएं शामिल हैं।

2 अक्टूबर को शुरू हुई यात्रा

यात्रा संघ के संयोजक सुमति प्रकाश वालावत ने बताया कि यात्रा 2 अक्टूबर को प्रारंभ हुई थी और संघ 19 अक्टूबर को प्रातः उदयपुर लौटेगा।

दल में 46 यात्री, एक ब्रह्मचारी भैया तथा चालक एवं रसोइया दल के सात सदस्य शामिल हैं। यात्रा में उदयपुर, प्रतापगढ़ एवं सलूंबर जिले के निवासी तथा अहमदाबाद एवं सूरत के प्रवासी श्रद्धालु भी सहभागी हैं।

कई प्रमुख तीर्थों की कर चुके हैं वंदना

यात्रा दल के सदस्य अशोक कुमार जेतावत ने बताया कि संघ मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं तमिलनाडु के प्रमुख तीर्थ क्षेत्रों, अतिशय क्षेत्रों और दर्शनीय स्थलों की यात्रा कर रहा है।

दल इंदौर, नेमावर, अंतरिक्ष पार्श्वनाथ, नेमगिरी, भोपाल, पुष्पगिरि, भोजपुर, मुक्तागिरि, भातकुली, कारंजा लाड़, सावरगांव, नवागढ़, परली बैजनाथ, तेर, श्रवणबेलगोला, मैसूर, कनकगिरी, धर्मस्थल, वैणुर, मूडबद्री, कारकल, वरंगा, ज्वालामालिनी, हुमचा पद्मावती एवं स्तवनिधि सहित अनेक क्षेत्रों की यात्रा कर चुका है।