कुण्डलपुर (म.प्र.)। निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने गुरु परंपरा समर्पण समारोह में कहा कि गुरु परंपरा केवल आयोजन नहीं, बल्कि गुरु के विचारों, आदर्शों, साधना और समाजहित के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प है।

उन्होंने कहा कि भगवान महावीर से गणधर गौतम स्वामी, आचार्य कुंदकुंद स्वामी और वर्तमान आचार्य परंपरा तक दिगंबर जैन धर्म ने त्याग, तपस्या और वीतरागता की विरासत को संरक्षित रखा है।

विद्यासागर महाराज की प्रेरणा से बने सेवा प्रकल्प

राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ एवं प्रचारमंत्री जयकुमार जैन ‘जलज’ ने बताया कि मुनि श्री ने आचार्य विद्यासागर जी महाराज के सामाजिक प्रकल्पों का उल्लेख करते हुए कहा कि हथकरघा, भाग्योदय, पूर्णायु, दयोदय महासंघ गौशाला, शांतिधारा दुग्ध योजना, प्रतिभास्थली तथा अनुशासन एवं प्रशासनिक प्रशिक्षण जैसे प्रकल्प उनकी दूरदर्शिता और समाज के प्रति संवेदनशीलता के उदाहरण हैं।

मुनि श्री ने कहा कि गुरु के विचारों को व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है।

निःस्वार्थ साधकों और दानवीरों का होगा सम्मान

मुनि श्री ने कहा कि धार्मिक विधान और पूजन का अपना महत्व है, किंतु गुरु के मिशन के लिए कठिन परिस्थितियों में निःस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले साधकों, कार्यकर्ताओं एवं दानवीर परिवारों का सम्मान भी किसी बड़े अनुष्ठान से कम नहीं है।

उन्होंने बताया कि अनेक ब्रह्मचारी भाई-बहनों, त्यागीवृत्ति के लोगों और गृहस्थ कार्यकर्ताओं ने अभावों और कठिन परिस्थितियों में रहते हुए गुरु प्रकल्पों को आगे बढ़ाया। इन सेवाभावी लोगों ने कभी पद, नाम या प्रतिष्ठा की अपेक्षा नहीं रखी।

पौधे के साथ दिया जाएगा सम्मान

समारोह में समर्पित साधकों एवं दानवीर परिवारों को चंदन लगाकर अभिनंदित किया जाएगा, प्रशस्ति पत्र दिए जाएंगे और गुरु के नाम पर एक पौधा भेंट किया जाएगा। मुनि श्री ने कहा कि यह पौधा सम्मान के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देगा।

सम्मानित व्यक्ति पौधे को कुण्डलपुर में रोपित कर सकते हैं अथवा अपने स्थान पर ले जाकर उसका संरक्षण कर सकते हैं।

युवाओं की भूमिका सराहनीय

समारोह के प्रारंभिक दिवस दमोह से कुण्डलपुर पहुंची विशाल अहिंसा वाहन रैली में युवाओं ने पंचरंगी ध्वज के साथ धर्म और अहिंसा का संदेश दिया। मुनि श्री ने युवाओं के उत्साह, श्रम एवं सुव्यवस्थित संयोजन की सराहना की।

उन्होंने कहा कि युवा ऊर्जा और वरिष्ठजनों के अनुभव के समन्वय से ही धर्म और समाज के कार्यों को सशक्त दिशा मिलती है।

समयसागर महाराज के मार्गदर्शन में आगे बढ़ेगी परंपरा

मुनि श्री ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज की विशाल विरासत को वर्तमान संघनायक आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मार्गदर्शन में सभी को मिलकर आगे बढ़ाना है। गुरु के प्रति समर्पण केवल शब्दों से नहीं, बल्कि त्याग, संयम, अहिंसा, समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण को जीवन में अपनाने से सार्थक होता है।

कार्यक्रम में ऐलक श्री निजानंदसागर जी महाराज ने भी संबोधित किया। मंच पर मुनि श्री पवित्रसागर जी महाराज सहित संघस्थ ऐलक, क्षुल्लक एवं ब्रह्मचारी विराजमान थे। कार्यक्रम का शुभारंभ बड़े बाबा, आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज एवं आचार्य विद्यासागर जी महाराज के चित्र अनावरण तथा दीप प्रज्वलन से हुआ। कार्यक्रम का संचालन कवि चंद्रसेन जैन ने किया।

श्रीफल साथी : राजीव सिंघई, कुण्डलपुर