कुंभोज, 23 सितंबर। आचार्य श्री 108 चंद्रप्रभसागर महाराज के शिष्य मुनि श्री 108 चंद्रकीर्ति महाराज की निर्जल उपवास साधना जारी है। बुधवार को उनका 13वां निर्जल उपवास रहा। मुनिश्री की तप-साधना से श्रद्धालुओं में धर्मभावना और अनुमोदना का वातावरण है।
दीक्षा और चातुर्मास यात्रा
मुनि श्री चंद्रकीर्ति महाराज का जन्म 1 मार्च 1985 को आळते में हुआ। उनका पूर्वाश्रम नाम राहुल रायगोंडा कनवाडे है। उन्होंने बी.ए. तक लौकिक शिक्षा प्राप्त की। कर्मभूमि हेरले रही है।
उन्होंने 30 अक्टूबर 2006 को गोरखपुर-अमरकंटक में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया। वर्ष 2013 में रामटेक में शांतिनाथ भगवान के समक्ष द्वितीय प्रतिमा तथा वर्ष 2016 के भोपाल चातुर्मास में तृतीय प्रतिमा ग्रहण की।
विजयादशमी, 2 अक्टूबर 2025 को चिपरी स्थित आचार्य श्री चिकित्सालय में उन्होंने मुनि दीक्षा ग्रहण की। प्रथम चातुर्मास वर्ष 2025 में कोथली में और द्वितीय चातुर्मास वर्ष 2026 में कुंभोज में चल रहा है।
तप-साधना की प्रेरक उपलब्धियां
ब्रह्मचर्य अवस्था में मुनिश्री ने 450 निर्जल उपवास किए। उनकी प्रमुख तप-साधनाओं में षोडशकारण के नौ निर्जल उपवास, जिनगुण संपत्ति के 65 उपवास, णमोकार मंत्र के 35 उपवास, दशलक्षण पर्व के नौ उपवास तथा प्रायश्चित के दस उपवास शामिल हैं।
उन्होंने 64 ऋद्धि के 65 उपवास भी किए हैं। वर्ष 2012 में सदलगा से सम्मेद शिखरजी तक पदयात्रा की। सम्मेद शिखरजी में 16 उपवास कर 17वें दिन पारणा किया तथा 18वें दिन पर्वत वंदना की। उसी वर्ष उन्होंने सम्मेद शिखरजी पर्वत की 24 वंदनाएं भी कीं।
श्रीफल साथी : अभिषेक अशोक पाटील




