कुचामन सिटी। दिगंबर जैन धर्मावलंबियों के आत्मशुद्धि, संयम एवं सद्गुणों की साधना के पावन पर्व दशलक्षण महापर्व के छठे दिन सोमवार को उत्तम संयम धर्म की श्रद्धापूर्वक आराधना की गई। डीडवाना रोड स्थित 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में प्रातः 6:30 बजे श्रावक-श्राविकाओं ने भगवान का कलशाभिषेक किया।

इसके पश्चात भगवान आदिनाथ एवं भगवान शांतिनाथ की शांतिधारा संपन्न हुई।

शांतिधारा का सौभाग्य

शांतिधारा का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी ललित कुमार-लेखराज पहाड़िया परिवार, दिलीप कुमार-आशीष कुमार काला परिवार, अनिल कुमार-अभिषेक पांड्या परिवार एवं विजय कुमार-संजय कुमार पहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ।

विशेष पूजन में उमड़े श्रद्धालु

श्रावक-श्राविकाओं ने देव-शास्त्र पूजन, सोलहकारण पूजन, धूप दशमी पूजन, दशलक्षण पूजन एवं दशलक्षण विधान में उत्तम संयम धर्म की विशेष पूजा भक्ति एवं श्रद्धा के साथ की।

कार्यक्रम में कमल कुमार, बाबूलाल, अशोक बज, सुरेश, अशोक-मनोज-लक्ष्य-तक्ष पाटोदी, विकास-विशाल-चिंटू-पारस पहाड़िया, आशीष झाझरी, विकास-संतोष-अंकित काला, राजेश-मनोज गोधा, विपिन-मुकेश गगवाल, हेमंत-संदीप पांड्या, मनोज-नितिन लुहाड़िया तथा रोनिक-मनीष अजमेरा सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने धार्मिक आयोजनों में भाग लिया।

इंद्रियों और कषायों पर नियंत्रण ही संयम

दशलक्षण धर्म का छठा धर्म उत्तम संयम धर्म है। इंद्रियों, मन एवं कषायों पर नियंत्रण रखते हुए अहिंसा और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलना ही इसका मूल संदेश है।

मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाना, विषय-वासनाओं पर नियंत्रण रखना तथा इच्छाओं और क्रोध, मान, माया एवं लोभ जैसी कषायों को संयमित करना ही उत्तम संयम धर्म की सच्ची आराधना है। संयम व्यक्ति को आत्मचिंतन की ओर ले जाता है और आत्मा की शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

आरती, सामायिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

सायंकाल मंदिर परिसर में आरती, सामायिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही तंबोला एवं अंताक्षरी कार्यक्रम में श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे दिन मंदिर परिसर भक्तिभाव एवं धार्मिक वातावरण से सराबोर रहा।

श्रीफल साथी : लालचंद पहाड़िया, कुचामन सिटी