इंदौर। छत्रपतिनगर के दलाल बाग में नित्य प्रातः चल रही धर्मसभा में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के श्रीमुख से आध्यात्मिक ज्ञान की अनुपम धारा का निरंतर प्रवाह हो रहा है। यहां पर देशभर से आने वाले गुरु भक्त श्रावक-श्राविकाएं मुनिश्री के दर्शन और मंगल आशीर्वाद के साथ ही इस अमृत ज्ञान की धारा में स्वयं को भिगोकर आनंदित महसूस कर रहे हैं। बुधवार को मुनिश्री सुधासागर जी ने जीवन में लक्ष्य, पुरुषार्थ, आत्म निरीक्षण और गुरु के महत्व पर प्रेरणादायी मार्गदर्शन दिया। मुनि श्री ने कहा कि किसी भी कार्य की सफलता के लिए सबसे पहले लक्ष्य निश्चित होना चाहिए। केवल रास्ता जानना पर्याप्त नहीं है, यह भी पता होना चाहिए कि जाना कहां है। उन्होंने कोल्हू के बैल का उदाहरण देते हुए कहा कि वह दिनभर चलता है, शरीर थक जाता है लेकिन, मंजिल पर नहीं पहुंचता। यही स्थिति उस व्यक्ति की है जो जीवनभर मेहनत करता है लेकिन, अपने लक्ष्य को निश्चित नहीं करता।
मैंने इतना किया, मुझे क्या मिला? से बचिए
मुनि श्री ने कहा कि परिवार, नौकरी या समाज में बार-बार यह सोचना कि “मैंने इतना किया, मुझे क्या मिला?” व्यक्ति के पुरुषार्थ को कमजोर कर देता है। इसके बजाय स्वयं से पूछिएकृ“मैं क्या बन रहा हूँ?” और मेरी मंजिल के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा क्या है? मेरी कमजोरी, मोह, भय, अहंकार, अपेक्षा और कषाय-इनका ईमानदारी से आत्मनिरीक्षण आवश्यक है।
गुरु के सामने अपने वास्तविक अनुभव को मत छुपाइए
मुनि श्री ने कहा कि जिनवाणी आत्मा को अजर-अमर-अविनाशी बताती है, लेकिन हमारा वर्तमान अनुभव कई बार भय, मोह और इंद्रिय विषयों से जुड़ा होता है। जिनवाणी को झूठा मत कहिए, लेकिन अपने अनुभव को भी झूठा मत बनाइए। उन्होंने कहा-गुरु के सामने बिल्कुल बालक बन जाइए। जो अनुभव हो रहा है, वही सच-सच बताइए। जिस प्रकार डॉक्टर से बीमारी छुपाने पर सही उपचार नहीं हो सकता, उसी प्रकार गुरु से अपने दोष और अनुभव छुपाने पर आत्मिक उपचार संभव नहीं है। क्रोध आता है तो स्वीकार करें, मोह है तो स्वीकार करें और पाप छोड़ नहीं पा रहे हैं तो कम से कम पाप को पाप कहना सीखें।
मन से हारना सबसे बड़ी हार
मुनि श्री ने कहा कि शरीर की थकान विश्राम से दूर हो सकती है, लेकिन मन की हार व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है। इसलिए परिस्थितियाँ कैसी भी हों, मन में आशा और पुरुषार्थ बनाए रखें।
प्रवचन का मूल सूत्र
मैंने क्या पाया?” से अधिक महत्वपूर्ण है-मैं क्या बन रहा हूँ? जीवन में केवल चलना नहीं, सही दिशा में चलना महत्वपूर्ण है। लक्ष्य निश्चित कीजिए, अपनी बाधाओं को पहचानिए, गुरु के सामने निष्कपट रहिए और निरंतर पुरुषार्थ करते हुए अपनी वास्तविक मंजिल की ओर बढ़ते रहिए।
धर्मसभा में विशेष उपस्थिति इनकी रही
बुधवार की धर्मसभा में अंतरराष्ट्रीय भजन गायक सुधीर व्यास ने मुनि श्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा अपना प्रख्यात भजन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन गोधा, हुकमचंद जैन काका, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद गोधा, महोत्सव अध्यक्ष अशोक डोशी, महामंत्री हर्ष जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।




